एसडीएम ही जारी करेंगे आदेश, उत्तराखंड में पुरानी व्यवस्था से ही होंगे पंजीकरण
उत्तराखंड में एक साल से अधिक पुराने जन्म और मृत्यु पंजीकरण मामलों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
ऐसे मामलों में अब फिलहाल उपजिलाधिकारी यानी एसडीएम ही पूर्व की व्यवस्था के तहत आदेश जारी करेंगे।
जनगणना कार्य निदेशालय उत्तराखंड ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की है।
निदेशालय ने बताया कि भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय से अंतिम संशोधन लागू होने तक पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी।
अधिसूचना के बाद पैदा हुआ था असमंजस
दरअसल, जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में वर्ष 2023 में संशोधन किया गया था।
एक साल से अधिक पुराने मामलों में जांच और सत्यापन के बाद एसडीएम आदेश जारी करते थे।
हालांकि, विधि मंत्रालय की छह अगस्त की अधिसूचना के बाद इस प्रक्रिया को लेकर असमंजस पैदा हो गया था।
इसके बाद कई जिलों में एसडीएम स्तर से ऐसे मामलों में आदेश जारी करना रोक दिया गया था।
इससे पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही थी।
कई लोगों को प्रमाणपत्र के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे।
महारजिस्ट्रार के संशोधन तक पुरानी व्यवस्था
जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक एवं संयुक्त महारजिस्ट्रार इवा आशीष श्रीवास्तव ने इस संबंध में पत्र भेजा है।
यह पत्र स्वास्थ्य सचिव और मुख्य रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु को आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए भेजा गया है।
पत्र में बताया गया है कि केंद्र स्तर पर अधिनियम में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से संशोधन पूरा होने के बाद ही नए प्रावधान लागू होंगे।
तब तक राज्य में पुराने नियमों के अनुसार ही प्रक्रिया जारी रहेगी।
लोगों को नहीं लगाने होंगे अनावश्यक चक्कर
निदेशालय ने सभी उपजिलाधिकारियों को पूर्व की तरह कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
एसडीएम संबंधित मामले की जांच और सत्यापन के बाद पंजीकरण का आदेश जारी करेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य पुराने मामलों में प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखना है।
साथ ही आम लोगों को अनावश्यक परेशानी और सरकारी कार्यालयों के चक्कर से राहत मिल सकेगी।
नए केंद्रीय प्रावधान लागू होने के बाद जन्म-मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा।















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