मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर निचली अदालतों में व्यापक पुनर्विन्यास
उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गुहानाथन नरेंद्र (G. Narendar) के आदेश पर 22 अगस्त, 2025 को एक बड़ी संख्या में निचली अदालतों के न्यायाधीशों का स्थानांतरण और पदोन्नति की गई।
रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी नवीनतम ट्रांसफर–पोस्टिंग नोटिफिकेशन (Admin.A-2/2025) में उल्लेखित पदोन्नतियों और पुनर्नियुक्तियों ने न्यायिक तंत्र में संतुलन लाने का उद्देश्य सामने रखा गया है।
पदोन्नति और पुनर्नियुक्तियाँ
- रविश रंजन, हल्द्वानी (नैनीताल) से अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नैनीताल बनाए गए, जबकि नेहा कुशवाहा को उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति की सचिवता दी गई।
- इंदु शर्मा को उधमसिंह नगर में द्वितीय अपर सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ संभाग) के रूप में नियुक्त किया गया; उनकी जगह नीरज कुमार को तृतीय अपर सिविल न्यायाधीश के रूप में तैनात किया गया।
- रमेश चंद्र और मीनाक्षी शर्मा को क्रमशः सिविल जज (सीनियर डिवीजन) में पदोन्नत किया गया, जबकि वीशाल वशिष्ठ, अमित भट्ट, ऐश्वर्या बोरा जैसे अन्य न्यायिक अधिकारियों को भी पदोन्नत कर उनके अनुभव को पूर्ण रूप से न्यायिक प्रक्रियाओं में शामिल करने का प्रयास किया गया है।
यह पुनर्विन्यास न्यायिक अधिकारियों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपने का अवसर प्रदान करता है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या इस परिवर्तन के बाद कार्यभार और संसाधनों का वितरण संतुलित रहेगा? पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में न्यायिक सेवा की पहुंच और प्रभावशीलता एक प्राथमिक मुद्दा बना रहेगा।
हालिया समय में न्यायपालिका के स्तर पर विविध सुधार भी देखे गए हैं, जैसे कि उच्च न्यायालयों में न्यायाधियों के स्थानांतरण और नए जजों की नियुक्ति। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर 17 उच्च न्यायालयों में न्यायाधियों के स्थानांतरण की केंद्रीय सरकार द्वारा ताजा मंजूरी भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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