हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला देकर ध्वस्तीकरण नोटिस पर रोक लगाई, प्राधिकरण को पोर्टल बनाने के निर्देश
नैनीताल हाईकोर्ट ने रामनगर के पुछड़ी गांव के 250 मकानों और दुकानों को तोड़ने के नोटिस पर फिलहाल रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मंगलवार को हुई सुनवाई में जिला विकास प्राधिकरण को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन करने का आदेश दिया।
दरअसल, प्राधिकरण ने 30 जुलाई 2025 को पुछड़ी गांव के परिवारों को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर अपने मकान खुद ध्वस्त करने का आदेश दिया था। नोटिस में कहा गया था कि 1986 के आदेश के मुताबिक यह इलाका मास्टर प्लान के तहत हरित क्षेत्र घोषित है।
ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में इस नोटिस को चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के तहत निजी संपत्ति से अतिक्रमण हटाने से पहले विस्तृत नोटिस और पोर्टल पर सुनवाई जरूरी है। कोर्ट ने माना कि प्राधिकरण का 15 दिन का नोटिस सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है।
सुनवाई में प्राधिकरण की ओर से कहा गया कि वे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे और तब तक किसी तरह की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं करेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डीएम के कंट्रोल में एक पोर्टल बनाना अनिवार्य होगा, जिस पर सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही कोई कार्रवाई की जा सकेगी।

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