छात्रों को मिलेगा सैन्य पराक्रम और राष्ट्रीय संकल्प का पाठ
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर दो विशेष शैक्षिक मॉड्यूल जारी किए हैं। इन मॉड्यूल्स को 3वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के सप्लीमेंट्री मैटेरियल के रूप में पढ़ाया जाएगा।
यह पहल केवल सैन्य कार्रवाई का विवरण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, राजनीतिक संकल्प और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी उजागर करती है।
दो चरणों में तैयार किए गए मॉड्यूल
एनसीईआरटी ने दो अलग-अलग स्तर के मॉड्यूल तैयार किए हैं—
- प्रारंभिक चरण (कक्षा 3 से 8वीं तक)
- माध्यमिक चरण (कक्षा 9 से 12वीं तक)
दोनों ही संवाद आधारित हैं, यानी शिक्षक और छात्रों के बीच प्रश्नोत्तर व चर्चा के माध्यम से ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी दी जाएगी।
मॉड्यूल में बताया गया है कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर में रेलवे नेटवर्क, पर्यटन और बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विकास हुआ।
बड़ी संख्या में पर्यटक घाटी आने लगे और क्षेत्र में शांति का वातावरण था। लेकिन यह प्रगति पाकिस्तान को स्वीकार नहीं हुई। इसी वजह से 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई।
पहलगाम हमला और TRF की भूमिका
शिक्षण सामग्री में स्पष्ट किया गया है कि हमले की जिम्मेदारी पहले TRF (द रेजिस्टेंस फ्रंट) ने ली, लेकिन बाद में उससे इनकार कर दिया।
भारतीय एजेंसी NIA ने सबूतों के आधार पर साफ किया कि हमले के पीछे TRF, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा शामिल थे। यह हमला पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के इशारे पर हुआ था।
ऑपरेशन सिंदूर: कड़ा जवाब और स्पष्ट संदेश
माध्यमिक स्तर के मॉड्यूल में ऑपरेशन सिंदूर को इस हमले का सटीक जवाब बताया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत ने साफ संदेश दिया कि अपने नागरिकों और मूल्यों की रक्षा के लिए कोई भी कीमत चुकाई जाएगी। इस कार्रवाई ने जनता के विश्वास को मजबूत किया और सशस्त्र बलों की छवि को और सशक्त किया।
मॉड्यूल में बताया गया है कि इस ऑपरेशन का नाम “सिंदूर” इसलिए रखा गया ताकि शहीद सैनिकों की पत्नियों के त्याग और पीड़ा को नमन किया जा सके। यह नाम महिलाओं की शक्ति और बलिदान को भी प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है।
इस शिक्षण सामग्री में विस्तार से बताया गया है कि तीनों सेनाओं ने कैसे ठिकानों का चयन किया, हथियारों का चुनाव किया और हमले का समय तय किया। भारत ने नौ आतंकी ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की, जिन्हें देश की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा माना गया था।

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