1200 से अधिक लोग सुरक्षित निकाले गए
उत्तराखंड के धराली में आई भारी आपदा को आठ दिन हो चुके हैं, और राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। सेना, पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीमें हर्षिल और धराली में सक्रिय रूप से खोज और बचाव अभियान चला रही हैं।
इस आपदा में फंसे 1200 से अधिक लोगों को गंगोत्री धाम से सुरक्षित निकालकर उत्तरकाशी और देहरादून पहुंचाया गया। इन लोगों में श्रद्धालु, स्थानीय निवासी और आपदा प्रभावित लोग शामिल थे।
खीर गंगा नदी का जलस्तर बढ़ा
हालांकि राहत कार्य जारी है, लेकिन धराली क्षेत्र में एक और समस्या उभर आई है। खीर गंगा नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है, जिससे इलाके में खतरा और बढ़ गया है।
इस दौरान, खीर गंगा के किनारे बनाई गई लकड़ी की पुलिया भी बह गई है, जिससे राहत कार्य में रुकावट आ सकती है। सेना की टीमें अब गंगोत्री नेशनल हाईवे को वैकल्पिक रूप से खोलने के लिए मलबे में काम कर रही हैं।
विनय शंकर पाण्डेय ने किया राहत कार्य का निरीक्षण
धराली आपदा क्षेत्र में राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए गढ़वाल मंडल के आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय ने मौके का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर धराली गांव के प्रभावितों को ₹5 लाख की अनुग्रह राशि का वितरण शुरू कर दिया गया है।
इसके अलावा, राहत और पुनर्वास के लिए एक पैकेज तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए सचिव राजस्व की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की गई है।
सीएम धामी ने भी धराली आपदा पीड़ितों के लिए एक महीने का वेतन देने की घोषणा की है। इसके साथ ही, आईएएस एसोसिएशन ने भी आपदा प्रभावितों के लिए आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।
वित्तीय मदद के तहत, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने धराली आपदा पीड़ितों के लिए 1-1 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की है।
भूवैज्ञानिक टीम भेजी गई
आपदा प्रभावित क्षेत्र में लगातार जलस्तर बढ़ने के कारण एसडीआरएफ की टीम गांववासियों को सतर्क कर रही है। मौसम विभाग द्वारा जारी भारी बारिश के अलर्ट के बाद क्षेत्र में अधिक सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन और पुलिस ने लोगों से नदी-नालों के पास जाने से बचने की अपील की है।
इसके साथ ही, देहरादून से भूवैज्ञानिकों की एक विशेष टीम भी आपदा स्थल पर भेजी गई है, जो इलाके के भूगर्भीय स्थिति का विश्लेषण करेगी और भविष्य में किसी भी बड़े खतरे से निपटने के लिए जरूरी उपाय सुझाएगी।
मृतकों और लापता लोगों की लिस्ट जारी




मौजूदा स्थिति और आगे की योजना
अभी तक, एसडीआरएफ के जवानों ने 1,278 लोगों को सुरक्षित निकाला है। राहत और पुनर्वास कार्य जारी हैं, और प्रभावितों को पुलिस और प्रशासन की ओर से खाद्य सामग्री वितरित की जा रही है।
विनय शंकर पाण्डेय ने कहा कि इस समय सबसे बड़ी चुनौती जलस्तर का बढ़ना और नदी के किनारे स्थित असुरक्षित बस्तियों का खतरे में होना है। राहत कार्यों में मदद के लिए एसडीआरएफ और सेना के जवान दिन-रात एक कर रहे हैं।

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