गंगा असनोड़ा
उत्तराखंड में लचर स्वास्थ्य सेवाओं से जनता कितनी बेहाल है, इसकी सूचनाएं आम रहती हैं। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री डा.धन सिंह रावत की घोषणाओं तथा निजी प्रयासों की बदौलत कुछ अस्पतालों को बेहतर बुनियादी ढांचा मिला तो है।
निर्माण से लेकर मशीनों की खरीद तक काफी कुछ बदला-बदला है, लेकिन फिर भी वास्तविक हालात कई बार सिर धुनने से अधिक कुछ नहीं लगते। बूढ़ाकेदार क्षेत्र के देवल गांव निवासी महावीर की कहानी देखकर हम इसका अंदाजा लगा सकते हैं।
बीते 11 जुलाई को गांव में दिहाड़ी-मजदूरी कर अपने तीन बच्चों का पालन-पोषण कर रहा महावीर एक छोटे से नाशपाती के पेड़ पर चढ़ा था कि अचानक वह पेड़ से नीचे गिर गया। इस घटना में उसके कूल्हे और पैर में चोट आई। श्रीनगर के संयुक्त अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ ने बताया कि उनके कूल्हे का आपरेशन होगा। एक सप्ताह के इंतजार के बाद महावीर के आपरेशन का दिन आया।
महावीर को एनेस्थीसिया दे दिया गया था और उसके कूल्हे का आपरेशन शुरू हो चुका था कि अचानक जिस टेबल पर महावीर लेटा है, उसका एक पाया टूट जाता है और टेबल धड़ाम से गिर जाता है। डाक्टर और अन्य स्टाफ महावीर को संभालने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन फिर भी महावीर आपरेशन के दौरान लुढ़क जाता है।
अब महावीर पहले से अधिक गंभीर स्थिति में है। इतना गंभीर कि उसे संयुक्त अस्पताल से बेस अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। यहां भाग्य से महावीर को दिन-रात कभी भी मरीजों की जरूरत पर हाजिर रहने वाले डा. दयाकृष्ण टम्टा उनके केस को देखते हैं। आपरेशन तय होता है, डाक्टर भी आपरेशन के लिए तत्पर हैं, लेकिन अचानक विद्युत सप्लाई में आई दिक्कत से ओटी में एसी चलना बंद हो जाता है और फिर महावीर को ओटी से अपने वार्ड में आपरेशन कराए बिना ही लौटना पड़ता है।
एक अगस्त को महावीर का आपरेशन सफलतापूर्वक हो गया है। संयुक्त अस्पताल में हुई घटना में डाक्टरों का कोई दोष नहीं और ना ही बेस अस्पताल में पहली बार टले आपरेशन के लिए डाक्टरों को दोष दिया जा सकता है, लेकिन यदि संयुक्त अस्पताल में ओटी टैक्नीशियन होता, तो शायद पहली बार में ही महावीर का सफल आपरेशन हो सकता था या बेस अस्पताल में विद्युत की सुचारू व्यवस्था होती, तो भी महावीर को पहली बार निराश नहीं होना पड़ता। बहरहाल, नमक-रोटी में भी खुशी-खुशी अपना जीवन काटने वाले 54 वर्षीय महावीर और उनकी पत्नी सुमित्रा इस बात से प्रसन्न हैं कि आखिर आपरेशन हो ही गया।
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