उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को नई पहचान देने के उद्देश्य से मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) डॉ. दीपक सैनी शुक्रवार 22 अगस्त को ‘प्रोजेक्ट-21’ के दूसरे चरण की ऐतिहासिक यात्रा पर रवाना हुए।
इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर से जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी और आईटीबीपी की 14वीं बटालियन के कमांडर आरबीएस कुशवाह ने उन्हें हरी झंडी दिखाकर विदा किया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने कहा कि यह अभियान जिले और प्रदेश दोनों के लिए गौरव का क्षण है।
उन्होंने विश्वास जताया कि डॉ. सैनी का यह प्रयास युवाओं को प्रेरित करेगा और साहसिक पर्यटन को नई दिशा देगा। उन्होंने प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
सात अंतरराष्ट्रीय दर्रों की चुनौती
डॉ. सैनी ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट-21’ के इस चरण में वह तिब्बत सीमा से लगे पिथौरागढ़ जिले के सात अंतरराष्ट्रीय दर्रों की चढ़ाई करेंगे।
इन दर्रों की ऊंचाई लगभग 5500 मीटर से अधिक है। साथ ही वह वाइब्रेंट विलेज का भ्रमण कर सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं का आकलन करेंगे।
उन्होंने कहा कि परियोजना के पहले चरण में वर्ष 2023 में चमोली जिले के 10 दर्रों की सफल चढ़ाई की जा चुकी है। तीसरे और अंतिम चरण में उत्तरकाशी जिले के चार दर्रों की चढ़ाई की जाएगी।
इस प्रकार कुल 21 दर्रों पर चढ़ाई का लक्ष्य पूरा होगा, जो एक व्यक्ति द्वारा स्थापित किया गया अनूठा कीर्तिमान होगा।
पर्यटन और सीमांत गांवों को बढ़ावा
‘प्रोजेक्ट-21’ का उद्देश्य साहसिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को सशक्त करना है।
डॉ. सैनी का कहना है कि यह प्रयास वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत सीमांत गांवों को पर्यटन की मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगा।
डॉ. सैनी ने इस अभियान में सहयोग देने के लिए पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल, ग्रामीण विकास सचिव राधिका झा, आयुक्त कुमाऊं डॉ. दीपक रावत, पिथौरागढ़ जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी, भारतीय सेना और आईटीबीपी की विभिन्न बटालियनों का आभार व्यक्त किया।

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