नए आपराधिक कानूनः न आईपीसी रही न चार सौ बीसी
भारती जोशी
भारत में कानूनों के बदलाव को लेकर बड़ी बहस चल रही है। अब न आईपीसी रही और न चार सौ बीसी। 1860 से चले आ रहे कानूनों के नाम बदल गए। न्याय व्यवस्था से जुड़ी प्रक्रिया के लिए आईपीसी, सीआरपीसी व एविडेंस एक्ट के नाम बदलकर जुलाई 2024 की पहली तारीख से बीएनएस, बीएनएसएस तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 हो गए हैं।
विशेषज्ञों की राय में कानूनों में बहुत कुछ नहीं बदला, हालांकि कुछ जोड़-घटाना अवश्य हुआ है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल युग में डिजिटलाइज्ड साक्ष्यों को कानूनी अमलीजामा पहनाने का है, जो बीएनएस, बीएनएसएस तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के विभिन्न प्रावधानों में शामिल है।
भारतीय कानूनों में डिजिटल व्यवस्था को मजबूती से स्थापित करते हुए भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया एक्ट 2023 ;डीआईएद्ध को स्थापित किया। नौ मार्च 2023 को इलेक्ट्राॅनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 (आईटी अधिनियम) के स्थान पर डिजिटल इंडिया अधिनियम का अनावरण किया।
https://youtu.be/sLJqKTQoUYs?si=8tGI45hfBbIrjUSv
डिजिटल इंडिया एक्ट में 1 सितंबर 2023 को लागू हुए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, डिजिटल इंडिया अधिनियम नियमावली, राष्ट्रीय डेटा गवर्नेंस नीति, साइबर अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता में संशोधन समेत अन्य संबंधित कानूनों एवं नीतियों के साथ मिलकर कार्य करने का लक्ष्य रखा गया।
यदि ईमानदारी से काम हो,तो डिजिटल इंडिया एक्ट में एक ऐसे डिजिटल परिदृश्य को आकार देने की क्षमता है,जो न सिर्फ व्यक्तियों व व्यवसायों को,बल्कि पूरे देश को लाभ पहुंचाने में सक्षम है। यह अधिनियम भारत के लिए एक सुरक्षित, जवाबदेह और अभिनव डिजिटल भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे कितनी कुशलता से अभ्यास में लाया जाएगा। नागरिकों की गोपनीयता बहुत जरूरी है।
डीआईए का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत सरकार ने वर्ष 2026 के लिए ‘डिजिटल इंडिया लक्ष्य’ को शामिल किया है। इस लक्ष्य के तहत भारत के लिए 1 ट्रिलियन अमेरिकी डाॅलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण करना और वैश्विक प्रौद्यौगिकियों के भविष्य को आकार देना है।
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