- देहरादून में 47 करोड़ की ठगी, निदेशक दंपती फरार
- फाइनेंस कंपनी ने सरकारी बैंकों से अधिक ब्याज का लालच देकर फंसाए हजारों निवेशक
राजधानी देहरादून में एक बार फिर बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। दून समृद्धि निधि लिमिटेड नाम की माइक्रो फाइनेंस कंपनी ने आम जनता को सरकारी बैंकों से अधिक ब्याज देने का झांसा देकर लगभग 47 करोड़ रुपये की ठगी की है।
कंपनी के फरार होने के बाद 150 से अधिक एजेंट सोमवार को एसएसपी कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने अपने और निवेशकों के पैसों की वापसी की गुहार लगाई।
पुलिस के अनुसार, कंपनी की ओर से दैनिक जमा, फिक्स डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) जैसी योजनाएं चलाई जा रही थीं।
निवेशकों को सरकारी बैंकों से अधिक यानी 8 से 12 प्रतिशत तक ब्याज देने का लालच दिया जाता था। इसी झांसे में आकर हजारों लोगों ने अपनी जमा पूंजी कंपनी में लगाई।
थाना नेहरू कॉलोनी में चौकी प्रभारी बाईपास प्रवीण पुंडीर की तहरीर पर इस मामले में छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
2022 में शुरू हुई कंपनी, निदेशक दंपती हुए फरार
तहरीर के मुताबिक, वर्ष 2022 में नीलम चौहान और उनके पति जगमोहन चौहान ने कंपनी की स्थापना की थी। कंपनी का कार्यालय दून विश्वविद्यालय रोड स्थित संस्कार एंक्लेव में था।
शुरुआत में कंपनी ने नियमित रिटर्न और मुनाफा देकर विश्वास जीता, लेकिन कुछ महीनों से रिफंड रोक दिया गया।
आखिरकार निदेशक दंपती कार्यालय बंद कर फरार हो गए, जबकि उनके अधीन कार्यरत कर्मचारी और एजेंट ग्राहकों के सवालों का जवाब देने में असमर्थ हैं।
कंपनी से जुड़े एजेंट्स का कहना है कि उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में सैकड़ों लोगों को निवेश के लिए जोड़ा था। लेकिन, अब कंपनी का कोई भी अधिकारी संपर्क में नहीं है और सभी बैंक खातों में लेन-देन बंद हो चुका है।
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि कंपनी द्वारा नियम विरुद्ध ब्याज दरों पर निवेश कराया जा रहा था। जांच के दौरान कंपनी के आठ बैंक खाते मिले हैं जिन्हें फ्रीज कर दिया गया है।
कंपनी निदेशक नीलम चौहान, संस्थापक जगमोहन चौहान, कमलेश बिल्जवान, कुसुम शर्मा, अनिल रावत और दीपिका सहित अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसएसपी ने कहा कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है और कंपनी के वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी निजी वित्तीय संस्था में निवेश करने से पहले उसकी वैधता और आरबीआई रजिस्ट्रेशन की जांच करें।
पुलिस के अनुसार, अत्यधिक ब्याज दरों का लालच देने वाली कंपनियां अक्सर पोंजी स्कीम या चिट फंड फ्रॉड के तहत काम करती हैं।
















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