बीमार महिलाओं को कंधों पर ढोकर पहुंचाया अस्पताल
आज़ादी के 78 साल बाद भी पहाड़ के कई गांव सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गुरुवार को चमोली जिले के सुदूरवर्ती डुमक गांव की 50 वर्षीय विमला देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को उन्हें 18 किलोमीटर दूर पथरीले रास्तों और उफनते गदेरों के बीच से पैदल डंडी-कंडी के सहारे अस्पताल तक ले जाना पड़ा।
गांव के युवाओं ने अपने जीवन की परवाह किए बिना महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुँचाया। ग्रामीणों का कहना है कि “देश आज़ाद हुए 78 साल हो गए, लेकिन डुमक आज भी सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहा है।”
इसी तरह उत्तरकाशी जिले के नौगांव विकासखंड के थोलिंका गांव में भी एक बुजुर्ग महिला सोबना देवी की तबीयत बिगड़ी। मार्ग बंद होने के कारण परिजनों को उन्हें पीठ पर लादकर कफनौल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना पड़ा। ग्रामीणों ने कहा कि कई दिनों से मोटर मार्ग बंद है और बीमारों को अस्पताल तक पहुंचाना बेहद कठिन हो गया है।
ग्रामीणों ने सरकार से स्वास्थ्य सुविधाओं और सड़क व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है। वहीं, लोनिवि अधिकारियों का कहना है कि मार्ग दलदल के कारण बाधित है और कार्य जारी है।
















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