विधि शिक्षा के विस्तार पर रोक का उद्देश्य गुणवत्ता सुधार
13 अगस्त, 2025 को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने Rules of Legal Education, Moratorium (Three-Year Moratorium), 2025 को मंजूरी दी, जो कि नए लॉ कॉलेजों की स्थापना पर तीन वर्षों के लिए रोक लगाता है। यह moratorium नियम लागू होने की तिथि से तीन साल तक प्रभावी रहेगा।
गुणवत्ता और नैतिकता पर ज़ोर
BCI ने इस moratorium का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए बताया कि, घटिया कानून संस्थानों की अनियंत्रित वृद्धि, आसानी से मिलने वाली अप्रभावी मंज़ूरी, शिक्षा का व्यावसायीकरण, शैक्षणिक कदाचार, और योग्य शिक्षकों की कमी इन समस्याओं के चलते कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है।
पहले से लगभग 2,000 लॉ कॉलेज देशभर में संचालित हैं, इसलिए अब विस्तार के बजाय गुणवत्ता और व्यवस्था में सुधार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
निर्देशों की रूपरेखा: क्या-क्या प्रतिबंध लागू हैं?
- स्थापना पर रोक: Moratorium अवधि में कहीं भी नए Center of Legal Education (CLE) की स्थापना नहीं होगी।
- विस्तार का नियम: मौजूदा संस्थानों द्वारा नए सेक्शन, पाठ्यक्रम या बैच शुरू करने की अनुमति BCI की पूर्व लिखित स्वीकृति के बिना नहीं दी जाएगी।
- लंबित प्रस्तावों पर असर: जिन प्रस्तावों को मंजूरी की अंतिम चरणों तक पहुंचाया जा चुका है, उन्हें कानून के अनुसार जारी रखा जाएगा और उन पर इस moratorium का प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अपवाद
कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट प्रदान की गई है, लेकिन उन्हें बहुत सख्त शर्तों के तहत अनुमति दी जाएगी—जैसे:
- अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)
- दिव्यांगजन और दूरदराज़ के आदिवासी क्षेत्र
लेकिन इन प्रस्तावों के लिए राज्य सरकार की अनुमति, पर्याप्त बुनियादी ढांचा और योग्य फैकल्टी अनिवार्य होगी।
अनुपालन और दंड: गंभीर निगरानी जारी
पेये हुए मानदंडों के पालन का निरीक्षण होगा और सभी मौजूदा संस्थानों को कड़े निरीक्षण (inspections) और अनुपालन ऑडिट (compliance audits) से गुजरना होगा।
उल्लंघन करने वाले संस्थान बंद, मान्यता रद्द, या BCI की मंजूरी से वंचित किए जा सकते हैं; साथ ही, जारी की गई डिग्री मान्य नहीं मानी जाएगी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शासनिक अधिकार: Advocates Act के अंतर्गत यह moratorium Advocates Act, 1961 की धारा 7, 24, 49 आदि के प्रावधानों के आधार पर जारी किया गया है, और यह पहले किए गए 2019 के moratorium और 2020 के न्यायिक निर्देशों के अनुरूप है

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