हैदराबाद मैराथन 2025 में 42 किमी की दौड़ में 2 घंटे 51 मिनट में स्वर्ण पदक
उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के वाण गांव की 23 वर्षीय धाविका भागीरथी बिष्ट ने हैदराबाद में आयोजित प्रतिष्ठित मैराथन दौड़ में 42 किलोमीटर की दूरी मात्र 2 घंटे 51 मिनट में पूरी कर स्वर्ण पदक जीता। इस उपलब्धि पर उन्हें तीन लाख रुपये की धनराशि भी प्रदान की गई।
भागीरथी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। पिता के निधन के बाद उन्होंने घर-परिवार की जिम्मेदारी निभाई। पढ़ाई के साथ-साथ घर के सारे काम किए और भाईयों की अनुपस्थिति में खेतों में हल तक चलाया। कठिन हालातों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया।

कोच सुनील शर्मा की भूमिका
भागीरथी के कोच सुनील शर्मा, जो हिमाचल प्रदेश के सिरमौर निवासी और स्वयं अंतरराष्ट्रीय मैराथन धावक हैं, ने बताया कि भागीरथी की सफलता उनकी मेहनत, संघर्ष और अनुशासन का परिणाम है। वर्तमान में भागीरथी पौड़ी जनपद के रासी स्टेडियम में कड़ी मेहनत कर रही हैं।
भागीरथी ने अपनी जीत के बाद कहा, “मेरा सपना है कि एक दिन ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर मैराथन में गोल्ड मेडल जीतकर तिरंगे को ऊंचा लहराऊं।” उनकी यह लगन और उपलब्धि आज पूरे उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

अगला कदम: एशियाई खेलों की ओर
भागीरथी की इस शानदार सफलता से न केवल उत्तराखंड प्रदेश, बल्कि चमोली जनपद और पूरा क्षेत्र गौरवान्वित हुआ है। उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण ने उन्हें एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार किया है।
भागीरथी बिष्ट की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और समर्पण की कहानी है, बल्कि यह उत्तराखंड केयुवाओं को यह संदेश देती है कि कठिनाइयों के बावजूद अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

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