अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा में किसी की गरिमा को ठेस पहुँचाना स्वीकार्य नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 25 अगस्त को इंडियाज़ गॉट टैलेंट के होस्ट समय रैना और चार अन्य सोशल मीडिया प्रभावितों को दिव्यांगजनों का मज़ाक उड़ाने के लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगने का निर्देश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दूसरे समुदायों या कमजोर वर्गों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले व्यावसायिक भाषणों पर लागू नहीं होती।
सोशल मीडिया दिशा-निर्देशों की तैयारी के लिए केंद्र को निर्देश
अदालत ने केंद्र से कहा कि दिव्यांगजनों, महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों का अपमान करने वाले भाषणों पर अंकुश लगाने के लिए सोशल मीडिया दिशानिर्देश बनाए जाएँ।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रैना समेत सभी प्रभावितों पर जुर्माना लगाया जाएगा यदि वे निर्देशों का पालन नहीं करते।
प्रतिवादियों के वकीलों ने अदालत को हलफनामे में भरोसा दिलाया कि वे अपने YouTube चैनलों और पॉडकास्ट पर माफी प्रकाशित करेंगे। अदालत ने यह वचन मानते हुए फिलहाल उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी।
पूर्व सुनवाई और न्यायिक विचार
15 जुलाई को सुनवाई के दौरान, अदालत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दूसरों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह भी कहा कि गरिमा की रक्षा भविष्य की पीढ़ियों के लिए जरूरी है और किसी के शब्द का दुरुपयोग न हो, इसके लिए एक स्पष्ट ढाँचा तैयार किया जाना चाहिए।
यह याचिका NGO क्योर एसएमए फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा दायर की गई थी। अदालत ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर विकलांगों का मज़ाक उड़ाना स्वीकार्य नहीं है। रैना और पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया पर महाराष्ट्र और असम पुलिस ने पहले मामले दर्ज किए थे।

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