रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

उत्तराखंड का कंडी मार्ग: 25 साल बाद भी सपना अधूरा

सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश से उम्मीदों को नई उड़ान

कुमाऊं और गढ़वाल को जोड़ने वाली 200 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक सड़क आज भी विवादों के बोझ तले; पर्यावरण, कोर्ट और सरकारी उदासीनता ने विकास की रफ्तार थाम रखी है।

विस्तार

25 साल बाद भी सपना अधूराउत्तराखंड राज्य बनने का 25वां वर्ष चल रहा है, लेकिन प्रदेश की सबसे चर्चित और ऐतिहासिक सड़क-कंडी मार्ग-आज तक पूरी तरह अस्तित्व में नहीं आ सकी है।

यह वही मार्ग है, जिसे ब्रिटिश काल में सब-माउंटेन रोड कहा जाता था और जो पहाड़–मैदान की सीमा तय करने वाली ‘जीवंत रेखा’ माना जाता था।

दशकों पुरानी मांग, अनगिनत राजनीतिक घोषणाएँ और कई दौर की फाइलों के बावजूद यह सड़क आज भी धरातल पर नहीं उतर पाई है।

हालाँकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उद्यानों के लिए एक समान नीति बनाने और स्थानीय हितों पर ध्यान देने का निर्देश देकर इस मार्ग के निर्माण की आशाओं को फिर जगा दिया है।

क्या है कंडी मार्ग की विशेषता

टनकपुर के पास ब्रह्मदेव मंडी से लेकर कोटद्वार तक फैला यह मार्ग कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों को सबसे छोटे रास्ते से जोड़ता था।

ब्रिटिश शासन में इस सड़क के ऊपर तैनात कर्मचारियों को पहाड़ी भत्ता मिलता था, जिससे यह मार्ग केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि पहाड़ की भौगोलिक सीमा का संकेतक भी रहा।

राज्य गठन से पहले ही इसे दोबारा खोलने की मांग उठनी शुरू हो गई थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक प्राथमिकताओं के बीच यह मुद्दा हर बार चुनाव तक सीमित होकर रह गया।

सड़क का 43 किमी हिस्सा कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में

रामनगर से कोटद्वार को जोड़ने वाले इस मार्ग का लगभग 43 किलोमीटर भाग कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के भीतर आता है।

1999 में केंद्र सरकार ने इसे आम जनता के लिए खोलने की मंजूरी दी थी, और वर्षों पहले यहाँ बस सेवा भी चलती थी।
लेकिन बाद में अदालत के आदेशों के चलते आवाजाही पर पूरी तरह रोक लग गई।

यहां अटक गया पूरा मामला

उत्तराखंड सरकार ने कंडी मार्ग को ऑल वेदर रोड के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भेजा था। इसी दौरान कुछ NGOs ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर कीं और तर्क दिया कि सड़क निर्माण से—

  • बाघों के आवागमन में बाधा पड़ेगी
  • वन्यजीवों पर दबाव बढ़ेगा
  • रिज़र्व क्षेत्र में मानव हस्तक्षेप बढ़ सकता है

सरकारी विभाग अदालत में मजबूत रूप से अपना पक्ष नहीं रख सके, और प्रोजेक्ट वर्षों से कानूनी उलझनों में फँसा हुआ है।

कॉर्बेट पार्क के निदेशक डॉ. साकेत बडोला के अनुसार, अदालत के आदेशों का अध्ययन करके ही आगे का कदम उठाया जाएगा।

नेताओं ने पहल की, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं

इस मार्ग के लिए कई नेताओं ने समय-समय पर बयान और दौरे किए:

  • एन.डी. तिवारी
  • त्रिवेंद्र सिंह रावत
  • तीरथ सिंह रावत
  • अनिल बलूनी
  • हरक सिंह रावत

कई सर्वे हुए, प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन हर बार योजनाएँ सिर्फ कागज़ी दस्तावेज़ बनकर रह गईं।

यह सड़क महज दो मंडलों को जोड़ने का माध्यम नहीं है, यह देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।

  • गढ़वाल में लैंसडाउन स्थित गढ़वाल रेजिमेंट सेंटर
  • और कुमाऊं में रानीखेत स्थित कुमाऊं रेजिमेंट मुख्यालय

के बीच तेज़ और सीधे संपर्क के लिए कंडी मार्ग अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

कंडी मार्ग बंद होने की वजह से रामनगर से कोटद्वार जाने के लिए लोगों को यूपी के रास्ते 165 किमी का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है।

यदि यह मार्ग चालू हो जाए तो दूरी घटकर 88 किमी रह जाएगी।

इससे—

  • यात्रा समय बचेगा
  • ईंधन की खपत कम होगी
  • प्रदूषण में कमी आएगी
  • दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार और पर्यटन बढ़ेगा

संघर्ष समिति की आवाज

कालागढ़ कंडी मार्ग निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष पीसी जोशी लगातार दो दशक से इसकी लड़ाई लड़ रहे हैं।
2005 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

हाईकोर्ट ने 2010 में मार्ग निर्माण पर सहमति भी दी, लेकिन 2014 में NGO विरोध के चलते उन्हें अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी।

उनके शब्दों में “रोक लगाने वाले तो बहुत हैं, लेकिन जनता के पक्ष की लड़ाई लड़ने वाला तंत्र लगातार कमजोर पड़ा है।”

सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश

17 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि—

  • सभी राष्ट्रीय उद्यानों के लिए एक समान नीति बने
  • स्थानीय लोगों के अधिकार और हितों का ध्यान रखा जाए

पीसी जोशी का मानना है कि इस आदेश से टाइगर रिज़र्व सहित सभी संरक्षित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए रास्ता साफ हो सकता है।

आंदोलन की नई तैयारी

2018 से परमिट सिस्टम के तहत भी यह मार्ग बंद है।

संघर्ष समिति अब कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों के आंदोलनकारियों की संयुक्त बैठक बुलाने जा रही है, ताकि सरकार पर मार्ग खोलने और निर्माण हेतु दबाव बनाया जा सके।

https://regionalreporter.in/dubai-air-show-incident/
https://youtu.be/kYpAMPzRlbo?si=tUvFzRYv25eFKHvh
Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: