टिहरी गढ़वाल के प्रतापनगर की रहने वाली युवती सरिता थलवाल, जिनका भावुक सुसाइड नोट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, अब पूरी तरह सुरक्षित हैं।
समय रहते जानकारी मिलने और पुलिस व स्थानीय लोगों की सक्रियता के कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई है। हालांकि, सरिता द्वारा नोट में लगाए गए भ्रष्टाचार और शोषण के आरोपों ने अब एक नई बहस छेड़ दी है।
पूरा घटनाक्रम: सोशल मीडिया पोस्ट से हड़कंप तक
सरिता ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पत्र साझा किया था, जिसमें उन्होंने अपनी जीवनलीला समाप्त करने की बात कही थी। इस पत्र के वायरल होते ही प्रशासन और उनके शुभचिंतकों में हड़कंप मच गया।
सरिता ने अपनी आर्थिक तंगी, परिवार की जिम्मेदारी और कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा किए जा रहे कथित शोषण का जिक्र किया था।
जैसे ही यह खबर फैली, पुलिस और स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आया और सरिता को सुरक्षित बचा लिया गया।
भ्रष्टाचार और डेटा लीक के गंभीर आरोप
भले ही सरिता की जान बच गई है, लेकिन उनके द्वारा उठाए गए सवाल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। उन्होंने ‘M/s Creative Services’ और कुछ व्यक्तियों (अमित चौधरी, नितिन कुमार, हिमेंद्र चौधरी और रेखा आर्य) पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं:
वित्तीय शोषण: आरोप है कि कंपनी ऑपरेटरों को वेतन या कमीशन नहीं देती, बल्कि उनसे पैसे ऐंठती है।
डेटा सुरक्षा पर सवाल: पत्र में दावा किया गया है कि आधार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां और डेटा गैर-कानूनी तरीके से लीक किया जा रहा है।
मानसिक प्रताड़ना: सरिता ने लिखा कि सही होने के बावजूद उन्हें गलत साबित करने की कोशिश की गई, जिससे वह गहरे मानसिक तनाव में आ गईं।
सीबीआई (CBI) जांच की मांग
सरिता ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पास इन आरोपों को साबित करने के लिए पुख्ता सबूत हैं, जिन्हें उन्होंने गूगल ड्राइव पर अपलोड कर सुरक्षित कर दिया है।
आगे क्या?
सरिता के सुरक्षित होने के बाद अब जनता और सामाजिक संगठनों की मांग है कि उन कारणों की गहराई से जांच हो, जिन्होंने एक होनहार युवती को इस चरम कदम की ओर धकेला।
यदि आधार डेटा लीक और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह एक बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।

















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