2 फरवरी 1984 से शुरू हुए ऐतिहासिक जन आंदोलन को लेकर 1–2 फरवरी को होंगे संवाद, मार्च और आम सभा
उत्तराखंड के ऐतिहासिक “नशा नहीं, रोजगार दो – काम का अधिकार दो” जन आंदोलन की
42वीं वर्षगांठ इस वर्ष भी व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाई जाएगी।
यह आंदोलन 2 फरवरी 1984 को चौखुटिया क्षेत्र के ग्राम बसभीड़ा से प्रारंभ हुआ था,
जिसने नशे के खिलाफ और रोजगार के अधिकार को लेकर राज्य की सामाजिक–राजनीतिक चेतना को नई दिशा दी।
आरती घाट में हुई तैयारी बैठक
वर्षगांठ कार्यक्रमों की तैयारी को लेकर चौखुटिया नगर स्थित आरती घाट में
सामाजिक–राजनीतिक कार्यकर्ताओं और जन संगठनों की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में कार्यक्रमों को व्यापक स्वरूप देने का निर्णय लिया गया,
साथ ही आयोजन की जिम्मेदारी के लिए संयोजन समिति का गठन भी किया गया।
वर्तमान हालात में आंदोलन की प्रासंगिकता
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आज उत्तराखंड नशाखोरी (विशेषकर ड्रग्स), बेरोजगारी, पलायन,
ठेकेदारी प्रथा, निजीकरण और जनविरोधी नीतियों जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है।
ऐसे समय में “नशा नहीं, रोजगार दो” आंदोलन पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है।
राज्यभर से संघर्षशील साथी, आंदोलनकारी शक्तियां, जन संगठनों के प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता
चौखुटिया पहुंचेंगे, जहां राज्य की दिशा और भविष्य की रणनीति पर सामूहिक मंथन किया जाएगा।
कार्यक्रम विवरण
1 फरवरी
स्थान: आरती घाट, चौखुटिया
समय: दोपहर 1:00 बजे से
- उत्तराखंड की वर्तमान स्थिति पर खुली बैठक
- “नशा नहीं, रोजगार दो” आंदोलन की भूमिका पर विचार-विमर्श
- राज्य को जनता के सपनों के अनुरूप बनाने की रणनीति पर संवाद
2 फरवरी
प्रातः 10:00 बजे:
➡️ चौखुटिया नगर में जन-जागृति एवं सांस्कृतिक मार्च
अपराह्न 2:00 बजे:
स्थान: ग्राम बसभीड़ा (आंदोलन की जन्मस्थली)
- आम सभा
- महिलाओं, युवाओं, छात्रों और क्षेत्रीय जनता के विचार
- वर्तमान परिस्थितियों में आंदोलन की भूमिका और जिम्मेदारियों पर चर्चा
आंदोलनकारियों से सहभागिता की अपील
आयोजकों ने सभी संघर्षशील साथियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जन संगठनों से 1 व 2 फरवरी के
कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।
आयोजन समिति का कहना है कि सामूहिक सहभागिता से
उत्तराखंड के लिए नई दिशा और मजबूत साझा संघर्ष की नींव रखी जा सकेगी।

















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