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सरोकारों से साक्षात्कार

सजा देना अदालत का काम, पुलिस का नहीं

यूपी में एनकाउंटर संस्कृति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही पुलिस मुठभेड़ों पर कड़ा रुख अपनाया है। खासतौर पर आरोपियों के पैरों में गोली मारकर उसे “एनकाउंटर” बताने की बढ़ती प्रवृत्ति पर अदालत ने गहरी चिंता जताई है।

कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और अपराधियों को सजा देना न्यायपालिका का अधिकार है, पुलिस का नहीं।

जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की एकल पीठ ने कहा कि प्रमोशन, लोकप्रियता या सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने के लिए गोली चलाना न केवल गलत है, बल्कि यह कानून व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा है।

अदालत ने यह भी साफ किया कि आरोपी के शरीर के किसी भी गैर-जरूरी हिस्से पर गोली चलाना कानूनन स्वीकार्य नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी कथित एनकाउंटर में यदि फायरिंग होती है या गंभीर चोट आती है, तो उस पर सख्त कानूनी प्रावधान स्वतः लागू होंगे। अदालत की टिप्पणी को पुलिस की कार्यशैली और जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है।

https://regionalreporter.in/new-strategy-to-tackle-human-wildlife-conflict/
https://youtu.be/QgkIh8RrhhI?si=350CT98OssopeXT5
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