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उत्तराखंड हाईकोर्ट: सहायता प्राप्त कॉलेजों के प्रवक्ताओं को मिलेगा चयन ग्रेड

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सहायता प्राप्त कॉलेजों के हिंदी, इतिहास और कला विषय के प्रवक्ताओं को

चयन ग्रेड और पदोन्नति वेतनमान देने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि पात्र प्रवक्ताओं की नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि

जोड़ते हुए आठ सप्ताह के भीतर चयन ग्रेड और बकाया राशि का भुगतान किया जाए।

साथ ही बकाया राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने को कहा गया है।

आठ सप्ताह में भुगतान के निर्देश

मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए।

अदालत ने कहा कि प्रवक्ताओं की नियुक्ति की तिथि से सेवा अवधि को जोड़ते हुए उनका चयन ग्रेड और पे-स्केल निर्धारित किया जाए।

कोर्ट ने आदेश दिया कि बकाया राशि का भुगतान आठ सप्ताह के भीतर किया जाए।

यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया तो संबंधित कर्मचारियों को 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।

दस वर्ष की सेवा के बाद भी नहीं मिला लाभ

याचिकाकर्ता राजेश कुमार वर्मा और अन्य प्रवक्ताओं ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि वे

सहायता प्राप्त कॉलेजों में हिंदी, इतिहास और कला विषय के प्रवक्ता हैं।

उन्होंने दस वर्ष से अधिक की संतोषजनक सेवा पूरी कर ली है,

लेकिन उन्हें अब तक चयन ग्रेड और पदोन्नति वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया।

याचिका में बताया गया कि राज्य सरकार के 4 मार्च 2014 के शासनादेश के अनुसार दस वर्ष की निरंतर संतोषजनक सेवा के बाद चयन ग्रेड

और 12 वर्ष की सेवा के बाद पदोन्नति वेतनमान दिया जाना चाहिए।

इसके बावजूद सरकार ने इस आदेश का पालन नहीं किया।

पहले भी आ चुके हैं प्रवक्ताओं के पक्ष में फैसले

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट वर्ष 2015 और 2018 में भी उनके पक्ष में फैसला दे चुका है।

इसके बावजूद सरकार ने उन आदेशों का अनुपालन नहीं किया।

इसी कारण उन्हें दोबारा न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

उर्दू शिक्षक की सेवा समाप्ति पर भी हाईकोर्ट की रोक

इसी दौरान हाईकोर्ट ने एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में हरिद्वार के सहायक अध्यापक (उर्दू) की सेवा समाप्ति के आदेश पर भी रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने जिला शिक्षा अधिकारी हरिद्वार के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार से छह सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

45 प्रतिशत अंक न होने पर समाप्त की गई थी सेवा

याचिकाकर्ता अनीश अहमद सिद्दीकी ने अदालत को बताया कि उनकी नियुक्ति 23 मई 2022 को

हरिद्वार में सहायक अध्यापक (उर्दू) के पद पर हुई थी।

उनके पास स्नातक और बीएड की डिग्री थी, लेकिन स्नातक में उनके 41 प्रतिशत अंक थे।

जिला शिक्षा अधिकारी हरिद्वार ने 25 अप्रैल 2026 को यह कहते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी कि स्नातक में उनके 45 प्रतिशत अंक नहीं हैं।

एनसीटीई नियमों का दिया गया हवाला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि 13 नवंबर 2018 की

एनसीटीई नियमावली के अनुसार जिन अभ्यर्थियों ने 29 जुलाई 2011 से पहले बीएड किया है,

उन पर स्नातक में 45 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता लागू नहीं होती।

याचिकाकर्ता ने वर्ष 2005 में स्नातक और 2008 में बीएड किया था।

इसलिए उनकी सेवा समाप्ति का आदेश नियमों के विपरीत बताया गया।

सरकार की दलील को कोर्ट ने किया खारिज

सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि याचिकाकर्ता के स्नातक में उर्दू मुख्य विषय नहीं था, इसलिए उनकी नियुक्ति और सेवा समाप्ति का आदेश वैध है।

हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश पर रोक लगा दी।

अब राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब न्यायालय में दाखिल करना होगा।

https://youtu.be/C0eGfOcIh_U?si=-J2COyIG1haR1aCD
https://regionalreporter.in/haridwar-dumper-car-accident-prd-jawans-injured/
https://youtu.be/C0eGfOcIh_U?si=-J2COyIG1haR1aCD

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