भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सचिव विनोद तोमर को मिली राहत
महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े बहुचर्चित मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने
भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह और संघ के पूर्व सचिव विनोद तोमर को बरी
कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार ने सोमवार को दोनों आरोपियों को आरोपों से मुक्त करने का आदेश सुनाया।
2 जुलाई को फैसला रखा गया था सुरक्षित
इस मामले में अदालत ने 2 जुलाई 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों
आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया, जिससे लंबे समय से चल रहे इस चर्चित मामले का एक महत्वपूर्ण कानूनी चरण
समाप्त हो गया।
2023 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
दिल्ली पुलिस ने 15 जून 2023 को इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। 7 जुलाई 2023 को अदालत ने चार्जशीट का संज्ञान
लिया था। बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354A, 354D और 506(1) के तहत
आरोप लगाए गए थे।
बाद में 10 मई 2024 को अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था,
जबकि 20 जुलाई 2023 को बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को जमानत मिल गई थी।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने रखे अपने तर्क
सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह की ओर से दलील दी गई कि आरोपित घटनाओं में से एक की तारीख पर वह भारत में
मौजूद नहीं थे और इसकी जांच कराने की मांग भी की गई थी। हालांकि अदालत ने उस याचिका को पहले ही खारिज कर दिया था।
वहीं महिला पहलवानों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने अदालत में पक्ष रखते हुए ओवरसाइट कमेटी की प्रक्रिया
और जांच पर सवाल उठाए थे तथा आरोपों के आधार पर मुकदमे को आगे बढ़ाने की मांग की थी।
देशभर में चर्चा में रहा था मामला
महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद वर्ष 2023 में जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन हुआ था।
इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और खेल जगत में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अब अदालत के ताजा फैसले के बाद इस मामले ने एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है।
















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