जौ की हरियाली से गूंजा केदारघाटी
भगवान विष्णु को अर्पित की गई हरियाली, घर-घर पहुंचाकर बुजुर्गों से लिया आशीर्वाद
भगवान शिव और माता पार्वती की पौराणिक विवाह स्थली त्रियुगीनारायण में हरियाली पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।
धुर्वाष्टमी के अवसर पर आयोजित पर्व में पूरी केदारघाटी लोक संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों के रंग में रंगी नजर आई।
पर्व के दौरान ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में मंदिर पहुंचे। पौराणिक गीतों और जयकारों से त्रियुगीनारायण का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
ग्रामीणों ने घरों में विधि-विधान से तैयार की गई जौ की हरियाली की पूजा की और उसे सबसे पहले भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित किया।
सात दिन पहले घरों में उगाई गई हरियाली
परंपरा के अनुसार ग्रामीण महिलाओं ने हरियाली पर्व से सात दिन पहले अपने-अपने घरों में जौ बोए थे।
पर्व के दिन तैयार हुई हरियाली को विधिवत एकत्र किया गया। इसके बाद वेद मंत्रोच्चार के बीच ग्रामीण इसे त्रियुगीनारायण मंदिर लेकर पहुंचे।
मंदिर में पुजारी ने हरियाली का विधि-विधान से पूजन कराया। पूजा के बाद सबसे पहले इसे भगवान विष्णु को अर्पित किया गया।
इसके बाद ग्रामीण हरियाली लेकर गांव के प्रत्येक घर पहुंचे और एक-दूसरे को भेंट की।

हरियाली बनी आपसी भाईचारे की परंपरा
ग्रामीणों ने बुजुर्गों को हरियाली भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता और आपसी भाईचारे का भी प्रतीक है।
ग्रामीण हरियाली को शुभता, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक मानते हैं।
त्रियुगीनारायण में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध वामन द्वादशी मेले में भी इसका विशेष महत्व है।
पर्व के दौरान तैयार हरियाली को प्रसाद के रूप में मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को वितरित किया जाएगा।
वामन अवतार से जुड़ी है पौराणिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के वामन अवतार से चार दिन पहले उन्होंने माता अदिति और देव कन्याओं को अपने विराट स्वरूप के दर्शन दिए थे।
मान्यता है कि भगवान विष्णु के दिव्य रूप से प्रसन्न होकर माता अदिति और देव कन्याओं ने उन्हें जौ की हरियाली भेंट की थी।
इसी मान्यता के आधार पर त्रियुगीनारायण में भगवान नारायण को सबसे पहले जौ की हरियाली अर्पित करने की परंपरा आज भी निभाई जाती है।
हरियाली पर्व के माध्यम से क्षेत्र की पौराणिक मान्यताओं और लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी जारी है।















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