प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ऊखीमठ के उच्चीकरण की मांग को लेकर तहसील परिसर में चल रहा
अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को 15वें दिन भी जारी रहा। शासन स्तर से 15 दिन में शासनादेश जारी करने के
आश्वासन के बावजूद आदेश जारी नहीं होने पर आंदोलनकारियों ने मुख्य बाजार में प्रदर्शन किया। इस दौरान
मदमहेश्वर घाटी की मातृशक्ति समेत जनप्रतिनिधियों, प्रधान संगठन, मजदूर यूनियन और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आंदोलन को समर्थन दिया।
मुख्य बाजार में प्रदर्शन, शासनादेश जारी करने की मांग
सोमवार को आंदोलनकारियों ने मुख्य बाजार से तहसील परिसर तक प्रदर्शन कर शासन-प्रशासन के खिलाफ
नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पीएचसी के उच्चीकरण की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, ले
किन अब तक शासनादेश जारी नहीं किया गया है।
धरना स्थल पर आयोजित सभा में पूर्व व्यापार संघ अध्यक्ष आनंद सिंह रावत और प्रधान गडगू सरिता नेगी ने कहा
कि ऊखीमठ भौगोलिक रूप से विषम परिस्थितियों वाला क्षेत्र है। मदमहेश्वर और तुंगनाथ घाटी समेत आसपास के
दूरस्थ गांवों के लिए ऊखीमठ स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है।
गंभीर मरीजों को श्रीनगर और रुद्रप्रयाग करना पड़ता है रेफर
आंदोलनकारियों का कहना है कि गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में मरीजों को श्रीनगर, रुद्रप्रयाग अथवा अन्य
बड़े चिकित्सा केंद्रों में रेफर करना पड़ता है। ऐसे में मरीज और उनके परिजनों को समय के साथ आर्थिक
परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।
उनका कहना है कि पीएचसी के उच्चीकरण से क्षेत्र के लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल
सकेंगी और गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
‘अब आश्वासन नहीं, शासनादेश चाहिए’
मजदूर यूनियन के अवतार नेगी और गुरिल्ला संगठन की जिलाध्यक्ष बसंती रावत ने कहा कि पीएचसी उच्चीकरण
की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। शासन स्तर से पहले सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था,
लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी शासनादेश जारी नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। शासनादेश जारी होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
मातृशक्ति ने संभाला मोर्चा
मदमहेश्वर घाटी से पहुंची महिलाओं ने भी आंदोलन में भाग लेते हुए मुख्य बाजार से तहसील परिसर तक प्रदर्शन
किया। नगर पंचायत अध्यक्ष कुब्जा धर्म्वाण और साक्षी नेगी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
का सबसे अधिक असर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में मरीज को दूर स्थित अस्पताल तक ले जाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन
जाता है। ऐसे में ऊखीमठ पीएचसी का उच्चीकरण पूरे क्षेत्र की जरूरत है।

15 दिन का आश्वासन पूरा नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संघर्ष समिति और व्यापार संघ अध्यक्ष राजीव भट्ट ने कहा कि स्वास्थ्य सचिव की ओर से मिले आश्वासन के अनुसार
15 दिन के भीतर पीएचसी उच्चीकरण का शासनादेश जारी किया जाना था, लेकिन अभी तक आदेश नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि जब तक शासनादेश जारी नहीं होता, तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप देने की चेतावनी भी दी गई।
आंदोलन में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, मातृशक्ति, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।















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