मुख्य सचिव को 9 महीने में फैसला लेने के निर्देश
मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी से जुड़े मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
यह जनहित याचिका सिटीजन्स फॉर ग्रीन दून की ओर से दाखिल की गई थी।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की पीठ ने की।
NGT के आदेश के बाद बनी थी नौ सदस्यीय समिति
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली ने ओरिजिनल एप्लीकेशन नंबर 51/2023 में आदेश पारित किया था।
इस आदेश के अनुसार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति ने मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी को लेकर रिपोर्ट तैयार की थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि संबंधित रिपोर्ट जमा किए जाने के दो साल से अधिक समय बीत चुका है।
याचिकाकर्ताओं ने रिपोर्ट से जुड़े अन्य मुद्दे भी अदालत के सामने रखे।
मुख्य सचिव को 9 महीने में निर्णय लेना होगा
हाईकोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों और सिफारिशों की जांच करना राज्य सरकार का विषय है।
अदालत ने इस आधार पर रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को उत्तराखंड सरकार के मुख्य सचिव के समक्ष प्रतिनिधित्व देने की छूट दी है।
अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता रिपोर्ट की प्रति के साथ प्रतिनिधित्व देते हैं,
और मसूरी की पहाड़ियों पर अत्यधिक दबाव कम करने के सुझाव रखते हैं, तो मुख्य सचिव मामले की जांच करेंगे।
मुख्य सचिव को हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ प्रतिनिधित्व मिलने की तारीख से नौ महीने के भीतर कानून के अनुसार उचित निर्णय लेना होगा।
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिजय नेगी, राज्य की ओर से एमएस बिष्ट,
NHAI की ओर से नरेश पंत और उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड की ओर से हरि मोहन भाटिया पेश हुए।















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