2 लाख में सिर्फ 37 हजार के जुर्माने जमा
उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा के लिए वाहनों की निगरानी और चालान की कार्रवाई तेज हो रही है,
लेकिन ई-चालान का जुर्माना वसूलना परिवहन विभाग और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
एएनपीआर कैमरों के जरिए नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के चालान तो काटे जा रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में वाहन स्वामी जुर्माना जमा नहीं कर रहे हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद परिवहन विभाग बकाया ई-चालान की वसूली के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
ई-चालान पर जुर्माना नहीं भरने वालों पर सख्ती की तैयारी
ऑफलाइन चालान होने पर वाहन चालक अक्सर जुर्माना जमा कर देते हैं, लेकिन ऑनलाइन चालान की वसूली में विभाग को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
यह समस्या केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में ई-चालान की बड़ी रकम लंबित है।
28 सितंबर 2026 को जारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, देशभर में ई-चालान के मद में करीब 49,194 करोड़ रुपये की वसूली होनी थी।
इसमें से लगभग 26,175 करोड़ रुपये ही वसूल हो पाए हैं। करीब 23,019 करोड़ रुपये की रकम अब भी बकाया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल बड़ी संख्या में चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
उत्तराखंड में 2.01 लाख ई-चालान, सिर्फ 37,755 का भुगतान
उत्तराखंड में वर्ष 2026 में अगस्त तक एएनपीआर कैमरों के जरिए कुल 2,01,015 ई-चालान किए गए।
इनमें से केवल 37,755 चालानों का जुर्माना जमा हुआ है।
यह कुल चालानों का लगभग 18.8 प्रतिशत है। यानी 81 प्रतिशत से अधिक चालानों का भुगतान नहीं हुआ है।
एएनपीआर चालान की जिलावार स्थिति
- ऊधम सिंह नगर: 63,854 चालान, 10,845 का भुगतान।
- देहरादून: 61,258 चालान, 13,477 का भुगतान।
- हरिद्वार: 42,523 चालान, 4,265 का भुगतान।
- नैनीताल: 22,007 चालान, 5,603 का भुगतान।
- चंपावत: 5,962 चालान, 1,431 का भुगतान।
- टिहरी गढ़वाल: 3,846 चालान, 1,585 का भुगतान।
- पौड़ी गढ़वाल: 1,565 चालान, 549 का भुगतान।
आंकड़ों के मुताबिक, देहरादून और ऊधम सिंह नगर में सबसे अधिक ई-चालान हुए हैं।
वहीं, हरिद्वार में भी बड़ी संख्या में चालान होने के बावजूद भुगतान का आंकड़ा काफी कम है।
बकाया होने पर आरसी, फिटनेस और अन्य सेवाओं पर लग सकती है रोक
ई-चालान की वसूली को प्रभावी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वाहन संबंधी ऑनलाइन सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने जैसे उपायों पर जोर दिया है।
इनमें रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) का नवीनीकरण और डुप्लीकेट आरसी जारी करने पर रोक शामिल है।
इसके अलावा वाहन स्वामी का पता बदलने, वाहन का स्वामित्व हस्तांतरित करने,
फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी करने जैसी सेवाओं को भी रोके जाने पर विचार किया जा रहा है।
बकाया चालान वाले वाहनों को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने और बार-बार नियम तोड़ने के मामलों में
ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगाने का विकल्प भी शामिल है।
जांच के दौरान बकाया ई-चालान मिलने पर वाहन जब्त करने की कार्रवाई भी प्रस्तावित उपायों में शामिल है।
देहरादून में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हुई चर्चा
5 अक्टूबर को देहरादून में सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति की अध्यक्षता में हुई बैठक में सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक में ई-चालान की वसूली को प्रभावी बनाने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करने पर भी जोर दिया गया।
अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के मुताबिक, बकाया ई-चालान की वसूली के लिए वाहन संबंधी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और ई-चालान व्यवस्था लागू करने के निर्देश भी दिए हैं।
इसमें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 28 अक्टूबर 2025 की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A के अनुपालन पर जोर दिया गया है।
अब परिवहन विभाग के सामने चुनौती केवल यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान करने की नहीं,
बल्कि जारी किए गए चालानों का जुर्माना वसूलने की भी है।
आने वाले दिनों में विभाग की कार्रवाई से स्पष्ट होगा कि बकाया ई-चालान की वसूली के लिए प्रस्तावित सख्ती किस हद तक प्रभावी साबित होती है।















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