बच्चे-बुजुर्ग बोले- हमें अपना घर बचाना है
मोहकमपुर–आशारोड़ी मार्ग पर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के विरोध में प्रभावित परिवारों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है।
14 अक्टूबर से विधानसभा के सामने चल रहे धरने में महिलाएं, युवा और बुजुर्गों के साथ बच्चे भी शामिल हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि परियोजना के लिए ऐसा विकल्प तलाशा जाए, जिससे उनके घरों को नुकसान न पहुंचे।
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि 19 सितंबर को उनके घरों के बाहर पीले निशान लगाए गए।
इससे पहले उन्हें परियोजना और उसके संभावित असर की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।
लोगों का कहना है कि घरों पर निशान लगने के बाद उन्हें पता चला कि प्रस्तावित एलिवेटेड रोड से उनके आशियाने प्रभावित हो सकते हैं।
बच्चों को भी सता रहा घर टूटने का डर
धरने में सातवीं कक्षा में पढ़ने वाला वंश भी पहुंचा। उसने बताया कि उसके पिता के कहने पर वह धरने में आया है।
वंश के मुताबिक, उसके परिवार की कई पीढ़ियां इसी घर में रही हैं और परिवार के सुख-दुख की यादें इससे जुड़ी हैं।
जब उससे घर की सबसे प्यारी चीज के बारे में पूछा गया, तो उसने कहा—उसका परिवार।
छठी कक्षा का केशव भी अपने पिता के साथ धरने में पहुंचा।
वहीं, दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली काव्या ने कहा कि वह अपने घर को टूटने से बचाने के लिए यहां आई है।
उसे उम्मीद है कि धरने में शामिल होने से उसका घर बच सकता है।

‘मुआवजा नहीं, हमें अपना घर चाहिए’
धरने में शामिल एक महिला ने बताया कि 16 साल तक किराये पर रहने के बाद उनके परिवार ने जमीन लेकर घर बनाया।
इसके लिए कर्ज भी लिया, जिसकी किस्तें अब तक चुकाई जा रही हैं।
एक अन्य महिला ने बताया कि उनका घर वर्ष 1996 में बना था। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत से बने घरों को छोड़ना आसान नहीं है।
एक प्रभावित महिला ने बताया कि उनकी शादी को अभी दस महीने हुए हैं और वह बनारस से यहां आई हैं।
नए घर में रहते हुए उन्हें सालभर भी नहीं हुआ, लेकिन अब घर पर संकट मंडरा रहा है।
उन्होंने कहा कि उनका विरोध विकास से नहीं, बल्कि घरों को नुकसान पहुंचाकर सड़क बनाने से है।
उनकी मांग है कि परियोजना के लिए दूसरा विकल्प तलाशा जाए।

माता-पिता का घर बचाने लंदन से पहुंचीं अदिति
धरने में लंदन में रहने वाली अदिति श्रीवास्तव भी अपने माता-पिता का घर बचाने पहुंचीं।
उन्होंने बताया कि उनका बचपन इसी घर में बीता है और उनके माता-पिता आज भी वहीं रहते हैं।
परियोजना से घर पर असर पड़ने की जानकारी मिलने के बाद वह अपने परिवार के समर्थन में धरने में शामिल हुईं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि घर उनके लिए केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं,
बल्कि वर्षों की मेहनत, कर्ज, यादों और पारिवारिक जीवन का हिस्सा है।
अब प्रभावित परिवार शासन और संबंधित विभागों से उनकी आपत्तियों पर सुनवाई
और ऐसा समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं, जिससे विकास के साथ उनके घर भी सुरक्षित रह सकें।
















Leave a Reply