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सरोकारों से साक्षात्कार

जौनसार-बावर में ढाई घंटे पैदल चलकर ससुराल पहुंची दुल्हन

सीएम धामी से मांगी सड़क

उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में सदियों पुरानी विवाह परंपराएं आज भी जीवंत हैं।

यहां की ‘जोजोड़’ परंपरा में दुल्हन बारात लेकर दूल्हे के घर जाती है।

लेकिन चकराता तहसील के उदावा गांव में इस परंपरा के साथ सड़क सुविधा का अभाव भी सामने आया।

बुल्हाड़ गांव निवासी शर्मिला का विवाह उदावा गांव के अनिल के साथ मंगलवार को हुआ।

शादी के बाद शर्मिला को ससुराल पहुंचने के लिए करीब ढाई घंटे पैदल चलना पड़ा।

उनके साथ आए ग्रामीणों ने भी लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पैदल तय की।

शादी की खुशियों के बीच सड़क की परेशानी

जौनसार-बावर के कुछ दूरस्थ गांवों में आज भी मोटर मार्ग नहीं पहुंचा है।

ऐसे में ग्रामीणों को शादी-विवाह, रोजमर्रा के काम और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए पैदल सफर करना पड़ता है।

उदावा गांव में दुल्हन और बारातियों को तय करनी पड़ी यह दूरी क्षेत्र में सड़क संपर्क की जरूरत को फिर उजागर करती है।

आधुनिक दौर में भी गांव तक पहुंचने के लिए पैदल चलना ग्रामीणों की मुश्किलों को दिखाता है।

सीएम धामी से मोटर मार्ग बनाने की मांग

दुल्हन शर्मिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उदावा गांव तक मोटर मार्ग बनाने की मांग की है।

उनका कहना है कि सड़क बनने से गांव के लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी।

मोटर मार्ग से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और दूसरी जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने में भी आसानी हो सकती है।

दूरस्थ गांवों तक कब पहुंचेगी सड़क

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और स्थानीय विकास से भी जुड़ा है।

उदावा गांव के मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि दूरस्थ गांवों तक बुनियादी सुविधाएं कब पहुंचेंगी।

अब देखना होगा कि शर्मिला की मांग पर शासन-प्रशासन क्या कदम उठाता है और गांव को सड़क सुविधा कब मिल पाती है।

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