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हिमालय की ‘सफेद’ वापसी: सात साल का सूखा खत्म

पौड़ी से चमोली, उत्तरकाशी से पिथौरागढ तक बारिश और बर्फबारी का

गंगा असनोडा

आज 23 जनवरी, 2026 का दिन उत्तराखंड के हिमालयी जनजीवन के लिए किसी उत्सव से कम नहीं रहा। लंबे समय से बारिश और बर्फबारी के लिए तरस रहे पहाड़ों को आखिरकार ‘वसंत’ ने नई उम्मीद दी है। समूचे उत्तराखंड में सात साल बाद एक साथ इतनी व्यापक बर्फबारी दर्ज की गई है, जिसने प्रकृति और स्थानीय निवासियों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है।

सात साल बाद ओढ़ी सफेद चादर
​पौड़ी मुख्यालय और आसपास के इलाकों के लिए आज की सुबह ऐतिहासिक रही। लगभग सात साल के लंबे इंतज़ार के बाद शुक्रवार सुबह जिले ने बर्फबारी का दीदार किया। खिर्सू, चौबट्टा खाल, मांडाखाल, टेका रोड जैसे ऊंचाई वाले इलाके पूरी तरह सफेद हो चुके हैं। पर्यटकों और स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा गया.लोग बर्फ के बीच तस्वीरें खींचते और इस पल को यादगार बनाते नजर आए।

चंबा तथा बौराडी में ‘चक्का जाम’: फंसे दर्जनों वाहन
​शुक्रवार सुबह से जारी भारी बर्फबारी के कारण चंबा और आसपास के इलाकों में सड़कों पर बर्फ की मोटी परत जमा हो गई है। फिसलन इतनी बढ़ गई है कि दर्जनों छोटे-बड़े वाहन बीच सड़क पर फंस गए हैं। वाहनों के पहिए थमने से यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

​चमोली: मेहलचौरी में 12 साल बाद लौटी रौनक
​बर्फबारी का सबसे सुखद नजारा चमोली जिले के मेहलचौरी में देखने को मिला। यहाँ 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बर्फ गिरी है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने एक दशक से ज्यादा समय से अपनी धरती को इस तरह सफेद होते नहीं देखा था। यह केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि सूखते जलस्रोतों और खेती के लिए एक संजीवनी बनकर आया है।

​हिमालयी जनजीवन को मिली नई ऊर्जा
​आज की तारीख यानी 23 जनवरी, 2026, हिमालयवासियों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से ‘विंटर रेन’ और बर्फबारी के न होने से खेती और पर्यावरण पर संकट मंडरा रहा था।

​खेती को लाभ: इस बर्फबारी से सेब, आड़ू और खुमानी जैसे फलों के साथ-साथ रबी की फसल को जबरदस्त फायदा होगा।

​पर्यटन में उछाल: अचानक हुई इस बर्फबारी से व्यापारियों के चेहरे खिल गए हैं, क्योंकि पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

​प्रशासन की अपील: ठंड बढ़ी, सावधानी जरूरी
​हल्की से मध्यम बर्फबारी के कारण तापमान में भारी गिरावट आई है। सड़कों पर फिसलन बढ़ने के चलते प्रशासन ने वाहन चालकों को ऊंचाई वाले इलाकों (विशेषकर पाला प्रभावित क्षेत्रों) में बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों तक ठंड और हल्की बर्फबारी की संभावना जताई है।

​आज हिमालय अपनी पुरानी रंगत में लौटा है। बारिश और बर्फ के लिए तरसते पहाड़ों को वसंत की इस दस्तक ने न केवल ठंडक दी है, बल्कि जल संचय और कृषि की नई उम्मीदें भी जगाई हैं।

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