तीनों पदों पर बीजेपी की जीत, कांग्रेस प्रत्याशी ने नाम वापसी कर बदला समीकरण
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के सबसे बड़े विकासखंड मंदाकिनी (अगस्त्यमुनि) में इस बार राजनीतिक इतिहास बदल गया। पहली बार प्रमुख पद पर भारतीय जनता पार्टी ने कब्जा जमाया है।
मंगलवार, 12 अगस्त को कांग्रेस प्रत्याशी गायत्री देवी द्वारा नाम वापसी के बाद बीजेपी की भुवनेश्वरी देवी निर्विरोध प्रमुख घोषित हो गईं।
मंगलवार दोपहर लगभग 12 बजे एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में बीजेपी नेता देवेश नौटियाल कांग्रेस प्रत्याशी गायत्री देवी को लेकर ब्लॉक मुख्यालय पहुंचे।
आरओ के सामने गायत्री देवी ने घोषणा की कि वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और क्षेत्र के विकास के लिए बीजेपी प्रत्याशी को समर्थन दे रही हैं और अपना नाम वापस ले रही हैं। इसके बाद आरओ ने भुवनेश्वरी देवी को निर्विरोध प्रमुख घोषित किया।
तीनों पदों पर निर्विरोध जीत से बीजेपी ने बनाया रिकॉर्ड
मंदाकिनी ब्लॉक में पहले ही ज्येष्ठ प्रमुख पद पर शांति चमोला और कनिष्ठ प्रमुख पद पर सविता भंडारी निर्विरोध निर्वाचित हो चुकी थीं। भुवनेश्वरी देवी की जीत के साथ तीनों पदों पर बीजेपी के प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए, जो इस ब्लॉक के इतिहास में पहली बार हुआ है।
जीत की घोषणा होते ही बीजेपी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। मुख्यालय पर आतिशबाजी हुई और कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया।

टिहरी जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर इशिता सजवाण
इसी दिन टिहरी जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला। पहले बीजेपी ने सोना सजवाण को अधिकृत प्रत्याशी बनाकर नामांकन करवाया था, लेकिन रातोंरात निर्णय बदलते हुए पार्टी ने इशिता सजवाण को टिकट दे दिया। सोना सजवाण ने इशिता के पक्ष में नाम वापस लिया और वह निर्विरोध अध्यक्ष बन गईं।
हालांकि टिहरी में कांग्रेस के पास इस बार बीजेपी से अधिक सदस्य थे, मगर मज़बूत प्रत्याशी की कमी और हिचकिचाहट के कारण उन्होंने दावेदारी नहीं की। वहीं, बीजेपी ने रणनीतिक कदम उठाकर निर्दलीय इशिता सजवाण को अपने पाले में कर लिया, जिससे कांग्रेस केवल देखती रह गई।
उत्तरकाशी में भाजपा को झटका
उत्तरकाशी में भाजपा के दीपक बिजल्वाण का दूसरी बार कुर्सी पर बैठने का सपना टूट गया। इसके लिए वे हाल ही में भाजपा में शामिल हुए थे और उम्मीद कर रहे थे कि पार्टी उन्हें समर्थन देगी, लेकिन यहां समीकरण उनके खिलाफ रहे। पार्टी ने अपने पुराने नेताओं पर भरोसा जताया, जिससे उनका सपना अधूरा रह गया।

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