19 अप्रैल से शुरू होगी यात्रा
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा 2026 आगामी 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ शुरू होने जा रही है।
यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए परिवहन विभाग ने कमर्शियल वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड बनाने की प्रक्रिया 30 मार्च से शुरू कर दी है।
हर साल चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु बस, टैक्सी और मैक्सी वाहनों से पर्वतीय मार्गों पर सफर करते हैं।
ऐसे में परिवहन विभाग की ओर से केवल फिट और सभी दस्तावेजों से पूर्ण वाहनों को ही ग्रीन कार्ड जारी किया जाता है।
ऋषिकेश में ग्रीन कार्ड कार्य का शुभारंभ
चारधाम यात्रा के मद्देनजर व्यावसायिक वाहनों को ग्रीन कार्ड जारी करने के लिए ऋषिकेश स्थित उपसंभागीय परिवहन कार्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने ग्रीन कार्ड से जुड़े कार्यों का शुभारंभ किया।
उन्होंने ग्रीन कार्ड सेंटर, कक्ष और वाहन निरीक्षण स्थल का रिबन काटकर उद्घाटन किया।
शुभारंभ के मौके पर यात्रा पर जाने वाले 40 बस, टैक्सी और मैक्सी वाहनों को ग्रीन कार्ड जारी किए गए।
चारधाम यात्रा में ग्रीन कार्ड क्यों जरूरी
चारधाम यात्रा के दौरान पर्वतीय मार्गों पर सफर करना चुनौतीपूर्ण होता है।
कई जगह तीखे मोड़, संकरी सड़कें और खराब मौसम जैसी परिस्थितियां रहती हैं। यही वजह है कि व्यावसायिक वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड अनिवार्य किया गया है।
ग्रीन कार्ड यह सुनिश्चित करता है कि वाहन के पास:
- सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हों
- फिटनेस प्रमाणपत्र वैध हो
- चालक के कागजात पूरे हों
- वाहन पहाड़ी मार्गों के लिए सुरक्षित हो
इसी व्यवस्था से यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और दुर्घटनामुक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
यहां बनवा सकते हैं ग्रीन कार्ड
वाहन स्वामियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने कई केंद्रों पर ग्रीन कार्ड पंजीकरण और जांच की सुविधा दी है।
मुख्य केंद्रों में शामिल हैं:
- हरिद्वार कार्यालय
- ऋषिकेश कार्यालय
- नारसन बॉर्डर
- रुड़की कार्यालय
- आशारोड़ी (देहरादून)
- विकासनगर
- टिहरी
- उत्तरकाशी
इसके अलावा प्रदेश के सभी RTO और ARTO कार्यालयों में भी ग्रीन कार्ड पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
परिवहन विभाग का मुख्य उद्देश्य यही है कि चारधाम यात्रा 2026 के दौरान केवल तकनीकी रूप से फिट वाहन ही पर्वतीय मार्गों पर चलें।
इससे न सिर्फ दुर्घटनाओं पर रोक लगेगी, बल्कि श्रद्धालुओं को भी सुगम और सुरक्षित यात्रा अनुभव मिलेगा।

















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