उत्तराखंड चारधाम यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत 15 सितंबर से होने जा रही है।
यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए परिवहन विभाग ने कमर्शियल वाहन चालकों के हेल्थ चेकअप को अनिवार्य किया है।
वाहन स्वामियों को अपने चालकों का हर साल स्वास्थ्य परीक्षण कराना होगा।
इसकी रिपोर्ट वाहन में रखना भी जरूरी होगा। विभाग का कहना है कि इस पहल से सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
वाहन स्वामी की होगी जिम्मेदारी
चारधाम यात्रा के नोडल अधिकारी संदीप सैनी के अनुसार, सभी कमर्शियल वाहनों के चालकों का सालाना हेल्थ चेकअप कराना होगा। इसकी जिम्मेदारी वाहन स्वामी की होगी।
स्वास्थ्य जांच की रिपोर्ट चालक को अपने साथ वाहन में रखनी होगी।
इससे यह पता चल सकेगा कि चालक वाहन चलाने के लिए पूरी तरह फिट है या नहीं।
यात्रा मार्गों पर बढ़ेगा वाहनों का दबाव
मानसून के बाद चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही यात्रा मार्गों पर कमर्शियल वाहनों का संचालन भी बढ़ेगा।
पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाएं शासन-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
परिवहन विभाग का मानना है कि चालक की असावधानी भी दुर्घटनाओं की एक प्रमुख वजह है।
ऐसे में विभाग ने चालकों के स्वास्थ्य परीक्षण को सड़क सुरक्षा से जोड़ते हुए यह निर्णय लिया है।
बस और ट्रक यूनियनों को भी भेजा पत्र
परिवहन विभाग ने बस और ट्रक यूनियनों को भी पत्र भेजा है। इसमें वाहनों को फिट रखने और सड़क दुर्घटनाओं से बचाव के संबंध में जानकारी देने को कहा गया है।
विभाग ने मानसून के दौरान वाहनों की स्थिति पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
वाहन की हेडलाइट, वाइपर और ब्रेक सही स्थिति में रखने को कहा गया है।
ओवरस्पीडिंग और नशे में ड्राइविंग से बचने के निर्देश
विभाग ने वाहन चालकों को ओवरस्पीडिंग और ओवरलोडिंग से बचने की सलाह दी है। इसके अलावा नशे में वाहन न चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यात्रा मार्गों पर वाहनों की फिटनेस और चालकों की सतर्कता से दुर्घटनाओं का खतरा कम किया जा सकता है।
पहले भी लगाया गया था हेल्थ चेकअप कैंप
संदीप सैनी ने बताया कि कुछ समय पहले सिटी बस चालकों के लिए निशुल्क हेल्थ चेकअप कैंप लगाया गया था।
इसमें चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था।
उन्होंने बताया कि आरटीए की बैठक में भी चालकों के हेल्थ चेकअप को लेकर चर्चा हुई थी।
इसके बाद सभी कमर्शियल वाहन चालकों का सालाना स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चालक को ऐसी कोई बीमारी न हो, जिससे वाहन चलाते समय दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।















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