चमोली जनपद के पल्ला गांव में मूसलाधार बारिश के चलते अबीर जितेड़ी क्षेत्र में भू-धंसाव की घटना से लगभग 25 घरों में दरारें पड़ गई हैं, जिससे गांव में भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई।
अंबेडकर बस्ती, पल्ला गांव में 30 परिवारों के घर दरारों में तब्दील हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि, टीएचडीसी की विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना के तहत हो रही भारी ब्लास्टिंग ने उनकी जमीन और छत छीन ली। सवाल सिर्फ भू-धंसाव का नहीं, बल्कि विकास बनाम विस्थापन का है।
444 मेगावाट की इस हाइड्रो पावर टनल से सरकार “ग्रीन एनर्जी” का दावा करती है। मगर जमीनी हकीकत ये है कि स्थानीय लोग बेघर हो रहे हैं।
प्रशासन ने संभावित खतरों को देखते हुए प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है।
ज्योतिर्मठ एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ, ने बताया कि राहत शिविर के रूप में लगभग 17 टेंट स्थापित किए गए हैं और प्रत्येक परिवार को राशन किट भी उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों से लगातार संपर्क और सहायता जारी है।
भू-वैज्ञानिक सर्वे योजना
एसडीएम वशिष्ठ ने आगे कहा कि भू-विज्ञानी विशेषज्ञों द्वारा सर्वेक्षण कराया जाएगा, ताकि धराशायी परिस्थितियों का सटीक मूल्यांकन हो सके।
सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में व्यापक रूप से संरक्षणात्मक और पुनर्वास संबंधी कार्यवाही की जाएगी।

















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