800 करोड़ के बहुचर्चित LUCC प्रकरण में पीड़ितों की शिकायतें एक मंच पर दर्ज कराने की तैयारी
उत्तराखंड के बहुचर्चित LUCC (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी) घोटाले में
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच एक और अहम मोड़ पर पहुंच गई है।
सीबीआई ने अब राज्य सरकार को पत्र लिखकर पूरे राज्य के निवेशकों के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल बनाने का प्रस्ताव दिया है,
ताकि LUCC से ठगे गए लोग एक ही मंच पर अपनी शिकायतें दर्ज कर सकें।
राज्य सरकार ने शुरू की कार्रवाई
सीबीआई के पत्र के बाद राज्य सरकार ने भी इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
वित्त विभाग ने इस संबंध में सहकारिता विभाग को पत्र भेजते हुए पोर्टल को जल्द से जल्द तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
पोर्टल के सक्रिय होने के बाद निवेशकों को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए थानों या सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश पर चल रही है CBI जांच
LUCC प्रकरण की जांच नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर रही है।
हाई कोर्ट ने 17 सितंबर 2025 को इस मामले में सीबीआई जांच के निर्देश दिए थे।
इसके बाद एजेंसी ने 18 एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
लंबे समय से निवेशक इस घोटाले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे, क्योंकि पहले सीबीसीआईडी और पुलिस की जांच से उन्हें संतोषजनक परिणाम नहीं मिल पाए थे।
CBI का उद्देश्य: सभी पीड़ितों का डेटा एक मंच पर
सीबीआई ने राज्य सरकार को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि
- LUCC से ठगे गए सभी निवेशक
- अपनी शिकायत
- निवेश से जुड़े दस्तावेज
- अन्य आवश्यक जानकारियां
एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे।
इससे जांच एजेंसी को पूरे राज्य के पीड़ितों का डेटा एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेगा और घोटाले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
800 करोड़ रुपये का अनुमानित घोटाला
LUCC पर
- अवैध रूप से सार्वजनिक जमा संग्रह
- धोखाधड़ी
- आपराधिक षड्यंत्र
- अनियमित जमा योजनाएं चलाने
जैसे गंभीर आरोप हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में करीब डेढ़ लाख से अधिक लोगों ने इस समिति में निवेश किया था।
कुल अनुमानित राशि लगभग 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।
आकर्षक ब्याज दरों का लालच देकर लोगों से पैसा जमा कराया गया और
साल 2024 में अचानक सभी कार्यालय बंद कर दिए गए। इसके बाद समिति से जुड़े लोग फरार हो गए।
राज्य के 9 जिलों में दर्ज हैं 18 मुकदमे
प्रदेश के
- देहरादून
- हरिद्वार
- पौड़ी
- चमोली
- टिहरी
- रुद्रप्रयाग
- उत्तरकाशी
- बागेश्वर
- नैनीताल
जिलों में LUCC के खिलाफ कुल 18 मुकदमे दर्ज हैं।
इन जिलों में समिति ने अपने कार्यालय खोलकर बड़े पैमाने पर निवेश जुटाया था।
46 आरोपी, मनी ट्रेल पर CBI का फोकस
इस मामले में पहले सीबीसीआईडी और पुलिस ने 10 मुकदमों में चार्जशीट दाखिल की थी।
इसके बाद मार्च 2025 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी।
सीबीआई ने प्रकरण दर्ज करते ही 46 लोगों को आरोपी बनाकर जांच शुरू की है।
अब एजेंसी का फोकस
- अधिकतम पीड़ित निवेशकों की पहचान
- घोटाले की वास्तविक रकम
- जिम्मेदार लोगों की भूमिका
- पैसे के पूरे रूट (Money Trail)
को उजागर करने पर है।
निवेशकों के लिए राहत की उम्मीद
LUCC घोटाले में केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल बनाने का सीबीआई का यह कदम निवेशकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
उम्मीद की जा रही है कि इससे न केवल पीड़ितों की आवाज सीधे जांच एजेंसी तक पहुंचेगी,
बल्कि 800 करोड़ रुपये के इस महाघोटाले के सभी दोषियों को कानून के कठघरे में लाया जा सकेगा।
















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