गंगा असनोड़ा
उत्तराखंड की राजनीति में ‘ऑल इज वेल’ के दावों के बीच हालिया कैबिनेट विस्तार किया गया, जिसमें हरिद्वार से
मदन कौशिक, रुद्रप्रयाग से भरत सिंह चौधरी, रुड़की से प्रदीप बत्रा, भीमताल से राम सिंह कैड़ा और राजपुर रोड से खजानदास को मंत्रीमंडल में शामिल किया गया।
युवा और तेज-तर्रार विधायकों को नहीं मिली जगह
इस विस्तार में देवप्रयाग के दो बार विधायक विनोद कंडारी और तेज-तर्रार नेता मुन्ना सिंह चौहान को जगह नहीं मिल पाई, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
संगठन के भीतर बदले समीकरण
इस फेरबदल ने सत्ता और संगठन के भीतर नए समीकरणों को जन्म दिया है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami का यह कदम सिर्फ विस्तार नहीं,
बल्कि चुनाव से पहले ‘पावर बैलेंस’ साधने की रणनीति माना जा रहा है।
धन सिंह रावत से अहम विभाग वापस
सबसे चौंकाने वाला फैसला कद्दावर नेता धन सिंह रावत से स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग वापस लेना रहा। यह विभाग उनकी प्रमुख उपलब्धियों में गिने जाते थे।
स्वास्थ्य सेवाओं की नाराजगी का असर
बीते समय में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और आंदोलनों से उपजी नाराजगी का असर इस फैसले में दिखता है। माना जा रहा है कि इसका जिम्मा डॉ. रावत पर डाला गया है।
सुबोध उनियाल को सौंपी गई जिम्मेदारी
स्थिति को संभालने के लिए अनुभवी नेता सुबोध उनियाल को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे ‘डैमेज कंट्रोल’ के तौर पर देखा जा रहा है।
धामी का बढ़ता कद और दिल्ली का समर्थन
मुख्यमंत्री धामी का हालिया दिल्ली दौरा और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात इस बात का संकेत है कि उन्हें अब पूरी तरह केंद्र का समर्थन प्राप्त है और वे मजबूत स्थिति में हैं।
2027 चुनाव से पहले सियासी संकेत
कुल मिलाकर यह कैबिनेट फेरबदल धामी के बढ़ते राजनीतिक कद और अन्य दिग्गज नेताओं के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति 2027 चुनाव में पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होती है या अंदरूनी असंतोष को बढ़ावा देती है।
















Leave a Reply