रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

FSSAI में ‘फर्जी नियुक्ति’ का तूफान! डायरेक्टर पर आरोप

खुलासा करने वालों पर FIR

सोशल मीडिया पर लीक दस्तावेजों से उठे सवाल-भर्ती में गड़बड़ी या संस्थान को बदनाम करने की साजिश? जांच शुरू

FSSAI इन दिनों बड़े विवाद के केंद्र में है।

संस्थान की डायरेक्टर (रेगुलेटरी कंप्लायंस) स्वीटी बेहरा पर नियुक्ति में कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप लगे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ दस्तावेजों ने इस मामले को और तूल दे दिया है।

वायरल दस्तावेजों से उठे सवाल

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए कथित दस्तावेजों में दावा किया गया है कि जिस पद पर स्वीटी बेहरा की नियुक्ति हुई, उसके लिए जरूरी अनुभव उनके पास नहीं था।

आरोप यह भी है कि कई योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर उन्हें चयनित किया गया।

कुछ पोस्ट्स में यह भी कहा गया कि उन्होंने अपने अनुभव में Nestlé India में काम करने की अवधि को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया, जिससे उनकी पात्रता पूरी होती दिखाई दे।

‘खुरपेंच’ का खुलासा और FIR

इस मामले को सबसे पहले ‘खुरपेंच’ नाम के सोशल मीडिया यूजर ने उठाया। उसने दस्तावेज शेयर कर FSSAI से जवाब मांगा।

हालांकि, इसके बाद दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और कई सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ FIR दर्ज हो गई।

एफआईआर में आरोप है कि—

  • गोपनीय दस्तावेज गैरकानूनी तरीके से हासिल किए गए
  • संस्थान को बदनाम करने की कोशिश की गई
  • एक संगठित ऑनलाइन अभियान चलाया गया

अंदरूनी जांच का भी दावा

वायरल पोस्ट्स में यह भी दावा किया गया कि 26 दिसंबर 2024 को FSSAI ने 6 वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की जांच कराई थी।
इनमें से 5 अधिकारियों के दस्तावेज कथित रूप से अधूरे या गलत पाए गए, जबकि केवल एक अधिकारी के दस्तावेज सही बताए गए।

हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पुलिस जांच: कौन है लीक के पीछे?

दिल्ली पुलिस अब इस मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि—

  • दस्तावेज लीक किसने किए?
  • क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क है?
  • क्या इसमें विदेशी फंडिंग या बाहरी प्रभाव शामिल है?

इसके लिए पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से अकाउंट्स की डिटेल्स भी मांगी हैं।

व्हिसलब्लोअर बनाम गोपनीयता की बहस

यह मामला अब सिर्फ एक नियुक्ति विवाद नहीं रहा, बल्कि व्हिसलब्लोअर और गोपनीयता के अधिकार के बीच टकराव का उदाहरण बन गया है।

जहां एक ओर आरोप लगाने वाले जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं संस्थान इसे बदनाम करने की साजिश बता रहा है।

अभी कई सवाल बाकी

  • क्या नियुक्ति में वाकई गड़बड़ी हुई?
  • या यह संस्थान को निशाना बनाने का प्रयास है?
  • दस्तावेज असली हैं या छेड़छाड़ किए गए?

इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।

https://regionalreporter.in/uttarakhand-prd-jawan-protest-365-days-employment-demand/
https://youtu.be/-PLjIlabqAY?si=UcbXQc8rSnK8NX2R
Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *