पुलिस ने छोड़ी पानी की बौछारें
भैरव दत्त असनोडा
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण में बजट सत्र के आगाज के साथ ही सियासी पारा चढ़ गया है। गैरसैण को स्थायी राजधानी घोषित करने और क्षेत्र में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की मांग को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को विधानसभा कूच किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प देखने को मिली।

पुलिस के पांच घेरे तोड़ आगे बढ़े कार्यकर्ता
केंद्रीय युवा मोर्चा अध्यक्ष आशीष नेगी के नेतृत्व में सैकड़ों यूकेडी कार्यकर्ता विधानसभा घेराव के लिए निकले। जोश से लबरेज कार्यकर्ताओं ने पुलिस द्वारा लगाए गए एक के बाद एक पांच बैरियरों को ध्वस्त कर दिया। जैसे ही प्रदर्शनकारी दिवालीखाल के मुख्य बैरियर पर पहुंचे, वहां स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
वाटर कैनन का प्रयोग और तीखी झड़प
दिवालीखाल बैरियर पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन नाकाम रहने पर वाटर कैनन (पानी की बौछारों) का इस्तेमाल करना पड़ा। भारी बौछारों के बीच भी कार्यकर्ता डटे रहे और बैरियर पार कर विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने अतिरिक्त फोर्स बुलाकर कार्यकर्ताओं को विधानसभा से महज आधा किलोमीटर पहले रोक दिया।

सड़क पर धरना और गिरफ्तारियां
आगे बढ़ने से रोके जाने पर आशीष नेगी के नेतृत्व में कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। उनकी मांग थी कि उन्हें राज्यपाल से मिलने दिया जाए। करीब 4 घंटे तक चले इस गतिरोध और प्रशासन की समझाइश के बाद भी जब कार्यकर्ता नहीं हटे, तो पुलिस ने बल प्रयोग कर 40 से 50 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को मालसी और महलचोरी में बनी अस्थायी जेलों में ले जाया गया.
गिरफ्तारी के दौरान कार्यकर्ताओं ने पुलिस वाहन के आगे लेटकर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया, जिससे पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
जंगल के रास्ते विधानसभा पहुंचने की कोशिश
एक ओर जहां मुख्य मार्ग पर संघर्ष चल रहा था, वहीं दूसरी ओर द्वाराहाट के पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, जोशीमठ जिला अध्यक्ष युद्धवीर सिंह नेगी, दिगंबर सिंह और लक्ष्मी सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने छापामार रणनीति अपनाते हुए जंगल के रास्ते विधानसभा कूच किया। हालांकि, विधानसभा के नजदीक पहुंचते ही पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया।



















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