‘हिमालय हैं तो हम हैं’ यात्रा में भावनात्मक अपील, लेकिन हाईवे चौड़ीकरण पर बढ़ा टकराव
हिमालय को बचाने की मुहिम अब केवल नारों तक सीमित नहीं रही।
गंगोत्री धाम के नज़दीक भैरोघाटी में पर्यावरणविदों की टीम ने देवदार के पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया।
संदेश साफ था यदि जंगल कटे, तो हिमालय भी नहीं बचेगा।
‘हिमालय हैं तो हम हैं’ अध्ययन यात्रा के तहत पहुंची टीम ने देवदारों की पूजा की।
इसके बाद लंका से भैरोघाटी तक सैकड़ों पेड़ों पर रक्षासूत्र बांधकर संरक्षण का आह्वान किया।
“देवदार केवल पेड़ नहीं, हिमालय की वार हैं”
पर्यावरणविदों का कहना है—
- देवदार भूस्खलन रोकते हैं
- यह जल स्रोतों को जीवित रखते हैं
- यह जैव विविधता की रीढ़ हैं
टीम का दावा है कि यदि इन पेड़ों को विकास के नाम पर काटा गया, तो हिमालय का पारिस्थितिक संतुलन टूट जाएगा।
नतीजतन, आपदाएं बढ़ेंगी और मानव जीवन पर सीधा खतरा आएगा।
लेकिन सड़क पर रुकी नहीं बहस
गंगोत्री नेशनल हाईवे चौड़ाईकरण को लेकर भैरोघाटी अब दो हिस्सों में बंटती दिख रही है।
एक तरफ पर्यावरण बचाने की पुकार है, तो दूसरी ओर विकास की मांग।
धराली के ग्रामीण हाईवे चौड़ीकरण के समर्थन में सड़क पर उतर आए हैं। उन्होंने साफ कहा रोज़गार और सुरक्षा सड़क से जुड़ी है, विरोध से नहीं।
पेड़ों को लेकर आंकड़ों की लड़ाई
धराली आपदा संघर्ष समिति के अध्यक्ष सचेंद्र पंवार ने कहा—
अफवाह फैलाई जा रही है कि 7,000 देवदार कटेंगे। सरकारी सर्वे में केवल 3,500 पेड़ों की बात है।
इनमें भी ज़्यादातर सेब, अखरोट और चीड़ के पेड़ हैं।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि हाईवे की चौड़ाई पहले 12 मीटर थी, जिसे घटाकर 11 मीटर कर दिया गया है।
पर्यावरणविद बनाम ग्रामीण: सड़क पर नाराज़गी
रविवार को जहां रक्षासूत्र बांधे गए, वहीं सोमवार को ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया।
नारे लगे। पुतला फूंका गया और पर्यावरणविदों पर विकास रोकने के आरोप लगाए गए।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोग पर्यावरण की आड़ में निजी एजेंडा चला रहे हैं।
चीन का ज़िक्र, भारत की सड़क
ग्रामीणों ने एक बड़ा तर्क आगे रखा चीन सीमा तक रेलवे बना रहा है, और हम सीमा तक सड़क भी नहीं बना पा रहे।
उनका कहना है कि गंगोत्री सड़क केवल यात्रा नहीं, रणनीतिक ज़रूरत है।
अब सवाल नीति का है, भावना का नहीं
भैरोघाटी आज एक चौराहे पर खड़ी है:
एक रास्ता जंगल बचाने का है दूसरा रास्ता विकास का लेकिन सवाल यह है: क्या बिना जंगल के विकास संभव है? या बिना सड़क के सुरक्षा?
https://youtu.be/OS2cl7ChTco?si=WZaXPnZYKhatsscWhttps://regionalreporter.in/the-157th-passing-out-parade-was-grandly-organized-at-the-ima/
Leave a Reply