अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 क्रैश हो गई।
बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान हादसे में 241 यात्रियों और चालक दल की मौत हो गई,
जबकि ग्राउंड पर भी 30 से ज्यादा लोगों की जान गई।
सरकार ने इस गंभीर हादसे की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है, जो तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
हादसा कैसे हुआ?
12 जून को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 ने अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से
लंदन गेटविक के लिए उड़ान भरी थी।
टेकऑफ के 30 सेकंड के भीतर ही विमान हवा में असंतुलित हो गया और पास ही स्थित बी.जे. मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल की इमारत से टकरा गया।
घटना में विमान में सवार 242 में से 241 लोग मारे गए।
केवल एक ब्रिटिश-भारतीय नागरिक विशाल रमेश चमत्कारिक रूप से जीवित बचे हैं। ग्राउंड पर भी हॉस्टल के छात्रों और कर्मचारियों की मौत हुई है।
सरकार की कार्रवाई: हाई लेवल कमेटी का गठन
भारत सरकार ने गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
इसमें DGCA, एयर इंडिया, वायुसेना और एविएशन विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। यह कमेटी निम्न बिंदुओं पर रिपोर्ट देगी:
- कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) का विश्लेषण
- पायलटों की फ्लाइट हिस्ट्री और निर्णय प्रक्रिया
- विमान की टेक्निकल मेंटेनेंस हिस्ट्री
- एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) संवादों की समीक्षा
- कमेटी को तीन महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही सभी बोइंग 787 विमानों की अतिरिक्त जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।
क्रैश हुए प्लेन का ब्लैक बॉक्स हॉस्टल की छत पर मिला
सूत्रों के अनुसार, ब्लैक बॉक्स बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल मेस बिल्डिंग की छत से बरामद किया गया है।
अहमदाबाद फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने बताया कि मेघानीनगर में ब्लैक बॉक्स खोजने के लिए मेटल कटर जैसे इक्विपमेंट्स के साथ एक टीम तैनात की गई थी।
टीम ने शुक्रवार को इसे खोज निकाला।
इसके अलावा पुलिस टीम ने बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल के सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) को भी अपने कब्जे में लिया है।
क्या होता है ब्लैक बॉक्स
हर प्लेन में नारंगी रंग का एक ‘ब्लैक बॉक्स’ होता है, जो कि इस तरीके से डिजाइन किया जाता है कि
आग में वह जलता नहीं है और पानी में गलता नहीं है।
हादसे के बाद जांच टीम का पहला काम प्लेन का ‘ब्लैक बॉक्स’ हासिल करना होता है।
ब्लैक बॉक्स में FDR (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) और CVR (कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर) होता है।
इसमें FDR विमान से जुड़े सभी तकनीकी डेटा को रिकॉर्ड करता है,
जबकि CVR दो पायलटों के बीच आखिरी मिनट तक कॉकपिट में हुई बातचीत को दर्ज करता है।
ज्यादातर विमान हादसों में प्लेन का अगला हिस्सा प्रभावित होता है,
इसलिए ब्लैक बॉक्स प्लेन के पूंछ वाले हिस्से में रखा होता है।

















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