प्रशासन–माफिया गठजोड़ पर उठे सवाल
मदमहेश्वर घाटी में बहने वाली मधु गंगा में अवैध खनन को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ऊखीमठ क्षेत्र में खनन माफियाओं और
प्रशासन के कथित गठजोड़ के चलते दिनदहाड़े और रात के अंधेरे में नदी का दोहन जारी है।
ग्रामीणों के अनुसार, रात के समय प्रशासनिक “हरी झंडी” मिलने के बाद खनन से
लदे वाहनों की आवाजाही शुरू होती है।
कई बार बिजली गुल होने के दौरान यह गतिविधि और तेज़ हो जाती है।
स्थानीय लोग लंबे समय से अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

निजी पट्टों की अवधि खत्म होने के बाद बढ़ा अवैध खनन
सूत्रों का दावा है कि 30 जून को सरकारी भूमि पर स्वीकृत निजी खनन पट्टों की
अवधि समाप्त होने के बाद स्थिति और बिगड़ गई।
पहले इन्हीं पट्टों के माध्यम से सरकार को राजस्व मिलता था और स्थानीय युवाओं को रोजगार
के अवसर भी उपलब्ध होते थे।
अब बिना अनुमति हो रहे खनन से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मंदाकिनी नदी पर पट्टे, मधु गंगा में नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि मंदाकिनी नदी पर विभिन्न स्थानों पर निजी पट्टों को स्वीकृति दी जा चुकी है,
लेकिन मधु गंगा में ऐसा नहीं होने के कारण जुगासू पुल के ऊपरी हिस्से समेत कई क्षेत्रों में अवैध खनन फल-फूल रहा है।
लोगों का सुझाव है कि यदि मधु गंगा में भी पारदर्शी तरीके से निजी पट्टे आवंटित किए जाएं, तो अवैध खनन पर प्रभावी रोक लग सकती है।
प्रशासन से वार्ता नहीं हो पाई
मदमहेश्वर घाटी में अवैध खनन के मुद्दे पर तहसील प्रशासन से बातचीत की कोशिश भी की गई,
लेकिन बताया गया कि अधिकारी आगामी केदारनाथ यात्रा से जुड़ी बैठकों में व्यस्त होने के कारण उपलब्ध नहीं हो सके।
इससे क्षेत्रीय जनता में नाराजगी और बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि मधु गंगा में हो रहे अवैध खनन की निष्पक्ष जांच हो,
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और नियमों के तहत समाधान निकालकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा दिया जाए।















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