मदमहेश्वर घाटी में भगवती राकेश्वरी की तपस्थली और चौखम्बा की तलहटी में
मदानी नदी के किनारे स्थित रासी गाँव धीरे-धीरे पर्यटक गाँव के रूप में विकसित हो रहा है।
द्वितीय केदार-मदमहेश्वर यात्रा में बढ़ती संख्या के कारण रासी गाँव में तीर्थाटन
और पर्यटन गतिविधियों को गति मिल रही है।
होमस्टे योजनाओं और होटल-लांजो के निर्माण से युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं,
जबकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक स्थानीय उत्पादों और मदमहेश्वर घाटी की परंपराओं से परिचित हो रहे हैं।
तीर्थाटन और पर्यटन में वृद्धि
रासी गाँव, तहसील मुख्यालय से मात्र 22 किमी की दूरी पर स्थित,
भगवती चंद्रकल्याणी राकेश्वरी की तपस्थली के रूप में विश्वविख्यात है।
यह गाँव मदमहेश्वर और मनणामाई यात्राओं का आधार शिविर रहा है।
सावन माह में मनणामाई माई की ऐतिहासिक लोकजात यात्रा
और सावन-भाद्रपद में पौराणिक जागरों की परंपरा आज भी ग्रामीणों के सहयोग से जीवित है।
सरकार से विकास की अपेक्षाएँ
राकेश्वरी मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष जगत सिंह पंवार
और बद्री-केदार मंदिर समिति के पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत का कहना है कि
यदि प्रदेश सरकार भगवती राकेश्वरी मंदिर को शीतकालीन यात्रा से जोड़ती है,
तो रासी गाँव और मदमहेश्वर घाटी पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान हासिल कर सकते हैं।
होमस्टे और पैदल ट्रैक के विकास से पर्यटक, सैलानी और प्रकृति प्रेमी घाटी की सुंदर वादियों का अनुभव कर पाएंगे।
प्रधान सोनिया पंवार ने बताया कि वर्ष भर धार्मिक अनुष्ठानों
और तीर्थाटन गतिविधियों से रासी गाँव में अपार पर्यटन संभावनाएँ हैं।
राकेश्वरी मंदिर समिति के कार्यकारी अध्यक्ष मदन भट्ट ने कहा कि
शीतकालीन यात्रा से जोड़ने की पहल रासी-मनणामाई, राऊलैक-कालीशिला
और बुरूवा-विसुणीताल पैदल ट्रैकों को विशिष्ट पहचान देगी और घाटी में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।















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