महिलाओं के विरुद्ध हिंसा उन्मूलन दिवस पर सकारात्मक बदलाव की मिसाल
महिलाओं के विरुद्ध हिंसा उन्मूलन के अंतर्राष्ट्रीय दिवस (25 नवंबर) के अवसर पर पौड़ी गढ़वाल स्थित राजकीय महिला कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र (नारी निकेतन) उम्मीद और परिवर्तन की एक मजबूत मिसाल बनकर सामने आया है।
वर्ष 1984-85 में कोटद्वार में स्थापित यह संस्थान कठिन परिस्थितियों से गुज़र चुकी बालिकाओं को सुरक्षा, शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से नया जीवन प्रदान कर रहा है।
सरकार की नीतियों से बदला संस्थान का स्वरूप
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा एवं पुनर्वास से जुड़ी नीतियों को मज़बूती मिली है।
इन नीतियों का सीधा प्रभाव नारी निकेतन जैसे संस्थानों पर दिख रहा है, जहाँ सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया है।
संवेदनशील नेतृत्व में नया जीवन पा रहीं बालिकाएँ
अधीक्षिका विजयलक्ष्मी भट्ट के नेतृत्व में संस्थान में रहने वाली बालिकाओं को सुरक्षित माहौल, मनोवैज्ञानिक सहयोग, व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार मार्गदर्शन और सम्मानपूर्वक जीवन जीने की दिशा मिल रही है।
संस्थान अब केवल आश्रय नहीं, बल्कि “नया संबल” बन चुका है।
कौशल विकास से सशक्त हो रहीं 13 बालिकाएँ
जिला परिवीक्षा अधिकारी के अनुसार संस्थान में 13 बालिकाएँ अध्ययनरत हैं, जो
• होटल मैनेजमेंट,
• ब्यूटीशियन,
• स्टेनो,
• कंप्यूटर बेसिक,
• खेल प्रशिक्षण
जैसे कौशल कार्यक्रमों से लाभ ले रही हैं।
हाल ही में एक बालिका का चयन हरिद्वार स्थित कैम्स कंपनी में सुरक्षा कर्मी के रूप में हुआ है।
सुव्यवस्थित भवन व सुरक्षित माहौल
संस्थान में हॉल, कमरे, डाइनिंग हॉल, स्वच्छ बाथरूम-टॉयलेट, इन्वर्टर, स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
साथ ही जिलाधिकारी के निर्देश पर विद्यालय व चिकित्सा आवश्यकताओं हेतु वाहन की व्यवस्था भी की जा रही है।
600 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम
पिछले दो वर्षों में पौड़ी जिले में
- 250 से अधिक महिलाओं/बालिकाओं का संरक्षण
- 18,000 से अधिक बच्चों को जागरूक करना
- 600 से अधिक कार्यक्रम आयोजित करना
नारी निकेतन के कार्यों की सफलता दर्शाता है।




















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