हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय प्रशासन ने राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) के प्रभावी अनुपालन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि अधिनियम के अंतर्गत आने वाले सभी दस्तावेज अब अनिवार्य रूप से हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में जारी किए जाएं।
परिपत्र में बताया गया है कि राजभाषा अनुभाग की तिमाही प्रगति रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय के कुछ विभागों द्वारा अब तक केवल अंग्रेज़ी में ही दस्तावेज जारी किए जा रहे थे,
जो अधिनियम का उल्लंघन है। इसे गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं
कि संकल्प, सामान्य आदेश, अधिसूचना, प्रशासनिक प्रतिवेदन, अनुबंध, लाइसेंस, टेंडर फॉर्म सहित धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले सभी दस्तावेज द्विभाषी रूप में तैयार, हस्ताक्षरित और प्रेषित किए जाएं।

इसके साथ ही दस्तावेज तैयार करने वाले कर्मचारियों, हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों और डिस्पैच से जुड़े कार्मिकों की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
विश्वविद्यालय ने सभी विभागों से परिपत्र की विषयवस्तु अधीनस्थ कर्मचारियों तक पहुंचाने और सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
















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