पंच केदारों में द्वितीय केदार मदमहेश्वर धाम की यात्रा इन दिनों जोखिम भरे रास्तों के सहारे संचालित हो रही है। देश-विदेश से आने वाले तीर्थ यात्री जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे हैं। खासकर गौंडार गांव और वनतोली के बीच क्षतिग्रस्त मार्ग यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
क्षतिग्रस्त रास्ते पर सफर करते समय पहाड़ी से बोल्डर गिरने का खतरा है, जबकि नीचे उफान पर बह रहे गदेरे भी जोखिम बढ़ा रहे हैं। वहीं, मोरखंडा नदी पार करने के लिए यात्री और स्थानीय लोग ट्रॉली का सहारा ले रहे हैं। ट्रॉली के एक छोर का आधार स्तंभ लगातार नदी की ओर धंस रहा है, जिससे कभी भी हादसा हो सकता है।
बीते दिनों भारी बरसात ने यात्रा मार्ग को और भी खतरनाक बना दिया। वनतोली में मोरखंडा नदी पर बना अस्थायी लकड़ी का पुल बह गया और गौंडार-वंटोली के बीच करीब 40 मीटर का पैदल रास्ता वॉश आउट हो गया। अब इस मार्ग को अस्थायी रूप से पहाड़ी पर बनाया गया है, लेकिन यहां से गुजरना यात्रियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।

स्थानीय लोगों और यात्रियों की व्यथा
गुजरात से आए एक यात्री ने बताया – “मदमहेश्वर धाम की यात्रा में काफी परेशानियां हो रही हैं। पहाड़ी टूटने से रास्ते खराब हो गए हैं। मेडिकल सुविधा कहीं नहीं है। यदि कोई आपात स्थिति होती है तो यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है। सरकार और प्रशासन को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए।”
स्थानीय निवासी अरविंद पंवार ने कहा – “हर साल बरसात में अस्थायी पुल बह जाता है। स्थायी पुल का निर्माण अब तक नहीं हो पाया है। इससे यात्रियों के साथ-साथ ग्रामीणों का भी जीवन खतरे में है और पर्यटन से मिलने वाला रोजगार प्रभावित हो रहा है।”
प्रशासन की तैयारी
रुद्रप्रयाग डीएम प्रतीक जैन ने कहा – “मदमहेश्वर यात्रा पड़ाव में व्यवस्थाओं को जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। क्षतिग्रस्त मार्ग को ठीक करने और स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने का काम जारी है। यात्रियों से अपील है कि वे मौसम को ध्यान में रखकर ही यात्रा करें।”
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