पूर्वी लद्दाख तनाव के बाद संबंध सामान्य बनाने और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता पर चर्चा की उम्मीद।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को सात साल बाद चीन पहुंचे, जहां उनका पारंपरिक संगीत और नृत्य के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया गया। पीएम मोदी यहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और रविवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक, दोनों नेताओं की वार्ता में भारत-चीन आर्थिक संबंधों का जायजा लेने और पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद तनावपूर्ण रिश्तों को सामान्य बनाने के उपायों पर चर्चा होगी। पीएम मोदी ने चीन पहुंचने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह शिखर सम्मेलन को लेकर उत्सुक हैं और वैश्विक नेताओं के साथ विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने पीएम मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा लाएगी। पीएम मोदी ने भी अपने हालिया साक्षात्कार में कहा था कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का मिलकर काम करना बेहद जरूरी है।
यह यात्रा चीनी विदेश मंत्री वांग यी की हालिया भारत यात्रा के तुरंत बाद हो रही है। उस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ वार्ता में दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति बनाए रखने, सीमा व्यापार खोलने और सीधी उड़ानें शुरू करने जैसे कदमों पर सहमति जताई थी।
गौरतलब है कि भारत और चीन के रिश्ते जून 2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद गंभीर तनाव में आ गए थे। अब दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग की दिशा में फिर से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
एससीओ में भारत सहित रूस, चीन, बेलारूस, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान सदस्य हैं। भारत 2017 से इसका सदस्य है और इससे पहले 2005 से पर्यवेक्षक रहा है। पीएम मोदी आखिरी बार जून 2018 में एससीओ सम्मेलन में चीन गए थे।
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