15 अप्रैल 2026 को हुई बारिश के बाद गढ़वाल घाटी में वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
वर्षा के कारण वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषक कण नीचे आ गए, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बेहतर हुआ है।
यह जानकारी Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University, श्रीनगर गढ़वाल के भौतिकी विभाग के वैज्ञानिक और Himalayan Atmospheric and Space Physics Research Laboratory के मुख्य अन्वेषक Dr. Alok Sagar Gautam ने दी।
इस शोध में उनके साथ शोध छात्र अंकित कुमार, अमनदीप विश्वकर्मा और सरस्वती रावत भी शामिल रहे।
बारिश के बाद प्रदूषण स्तर में आई कमी
वैज्ञानिकों के अनुसार वर्षा के बाद किए गए अवलोकनों में ब्लैक कार्बन का स्तर 745 नैनोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
कणीय प्रदूषण में PM10 का स्तर 38.68 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, PM2.5 का स्तर 31.81 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तथा PM1 का स्तर 12.20 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पाया गया।
गैसीय प्रदूषकों में NO का स्तर 1.52 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, NO₂ का स्तर 19.77 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और NOx का स्तर 11.72 ppb दर्ज किया गया।
इसके अलावा NH₃, CO, CO₂, SO₂ और ओजोन (O₃) के स्तर भी मापे गए, जो सामान्य सीमा के आसपास पाए गए।
मौसम संबंधी आंकड़े
मौसम के आंकड़ों के अनुसार लगभग 830 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। तापमान करीब 22 डिग्री सेल्सियस और सापेक्ष आर्द्रता 46.28 प्रतिशत रही, जिससे वायुमंडल में मौजूद प्रदूषक कणों के जमने में मदद मिली।
जंगल की आग और कम हवा बने प्रदूषण के कारण
पिछले कुछ समय से गढ़वाल घाटी में बढ़ता वायु प्रदूषण चिंता का विषय बना हुआ था। सुबह के समय हल्की धुंध भी दिखाई देने लगी थी।
वैज्ञानिकों के अनुसार जंगलों में लग रही आग, वातावरण में बढ़ते सूक्ष्म कण, अधिक नमी और हवा की कम गति इसके प्रमुख कारण रहे हैं।
सर्दियों में बढ़ा था ब्लैक कार्बन
डॉ. आलोक सागर गौतम के अनुसार सामान्य दिनों में इस क्षेत्र में ब्लैक कार्बन का स्तर लगभग 2000 से 5000 नैनोग्राम प्रति घन मीटर रहता है,
लेकिन हाल के दिनों में यह बढ़कर 9000 से 10,000 नैनोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया था, जो पहाड़ी क्षेत्रों के लिए काफी अधिक माना जाता है।
जनवरी से मार्च तक का अध्ययन
शोध के अनुसार जनवरी 2026 में कणीय प्रदूषण अपेक्षाकृत अधिक पाया गया।
इस दौरान PM10 का औसत स्तर 155.18 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM2.5 का औसत स्तर 131.77 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
फरवरी में इसमें कुछ कमी देखी गई, जबकि मार्च में फिर से सूक्ष्म कणों की मात्रा में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे वायु गुणवत्ता पर असर पड़ा।
स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ते वायु प्रदूषण का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
इससे खांसी, गले में जलन, आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत, एलर्जी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
इसलिए बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
वर्षा से मिलती है राहत
वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश वायु प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्षा की बूंदें वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषक कणों को नीचे गिरा देती हैं, जिससे हवा साफ हो जाती है।
यदि आने वाले दिनों में हल्की या मध्यम वर्षा होती है तो वायु गुणवत्ता में और सुधार हो सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए सुझाव
विशेषज्ञों ने गढ़वाल घाटी में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने, वाहनों के धुएं को नियंत्रित करने, कचरा और बायोमास जलाने से बचने,
धूल नियंत्रण उपाय अपनाने और वनाग्नि प्रबंधन को मजबूत करने की सलाह दी है।
















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