ब्रह्म मुहूर्त में पूर्ण वैदिक विधि-विधान के साथ रुद्रनाथ मंदिर कपाट बंद
पंचकेदारों में से चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट शुभ मुहूर्त में शीतकाल के लिए
परम्परानुसार बंद कर दिए गए।
ब्रह्म मुहूर्त में मुख्य पुजारी सुनील तिवारी ने पूर्ण वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न की।
मंदिर परिसर शिव भक्तों के “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा।
कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली अपनी शीतकालीन गद्दीस्थल श्री गोपीनाथ मंदिर,
गोपेश्वर के लिए रवाना हुई। अब अगले छह महीनों तक श्रद्धालु भगवान रुद्रनाथ
के दर्शन गोपेश्वर स्थित इस मंदिर में कर सकेंगे।
छह माह गोपेश्वर में विराजेंगे रुद्रनाथ
करीब 11,808 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस दिव्य धाम तक पहुंचने के लिए
श्रद्धालुओं को लगभग 19 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई तय करनी पड़ती है।
कपाट बंद होते समय सैकड़ों भक्त इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने।
रुद्रनाथ मंदिर पंचकेदारों में से एक है, जहाँ भगवान शिव के एकानन (मुख) की पूजा होती है।
जबकि भगवान के संपूर्ण शरीर की पूजा नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में की जाती है।
















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