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श्रीनगर टीचर कॉलोनी: दो विरोधाभासी रिपोर्टों ने बढ़ाए सवाल

ब्लास्टिंग से दरारें, 8 महीने बाद भी मुआवजा नहींअब जांच पर उठे गंभीर प्रश्न

श्रीनगर गढ़वाल की टीचर कॉलोनी में रेलवे सुरंग निर्माण के दौरान हुई ब्लास्टिंग से मकानों में आई दरारों का मामला

अब और उलझता जा रहा है।

1 सितंबर 2025 को सामने आई इस घटना के बाद जहां कई परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए, वहीं अब जांच रिपोर्टों में विरोधाभास ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है।

NH-7 क्षेत्र तक दिखा भू-धंसाव, लोग हुए विस्थापित

घटना के दौरान न केवल टीचर कॉलोनी के नौ मकानों में दरारें आईं, बल्कि NH-7 के आसपास भी बड़े क्षेत्र में भू-धंसाव देखने को मिला।

स्थिति इतनी गंभीर थी कि लोग आनन-फानन में अपने घर छोड़कर किराए के मकानों में रहने लगे।

किराए से लौटे, फिर खतरे में रहने को मजबूर

कुछ समय बाद आर्थिक दबाव के चलते कई परिवार अपने क्षतिग्रस्त घरों में वापस लौट आए।

आज भी कई लोग दरारों वाले मकानों में रह रहे हैं, जहां हर पल हादसे का डर बना हुआ है।

तकनीकी टीम गठित, लेकिन रिपोर्ट पर विवाद

प्रभावित लोगों की मांग पर जिला प्रशासन ने एक तकनीकी टीम का गठन किया, जिसमें

  • लोक निर्माण विभाग
  • सिंचाई विभाग
  • नेशनल हाईवे
  • और एक भूवैज्ञानिक

को शामिल किया गया।

लेकिन अब सामने आया है कि इस टीम की ओर से दो अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं।

दो रिपोर्ट, दो दावेसच्चाई क्या?

  • एक रिपोर्ट (बिना आधिकारिक मोहर) में कहा गया कि रेलवे ब्लास्टिंग से कोई नुकसान नहीं हुआ।
  • दूसरी रिपोर्ट (प्रशासन के माध्यम से) में स्पष्ट रूप से ब्लास्टिंग को ही मकानों की दरारों का कारण बताया गया।

इन विरोधाभासी रिपोर्टों ने पूरे मामले पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

प्रशासन ने ‘नो डैमेज’ रिपोर्ट से किया इनकार

हाल ही में हुई बैठक में उप जिलाधिकारी नूपुर वर्मा ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की ओर से ऐसी कोई रिपोर्ट जारी नहीं की गई है, जिसमें रेलवे को क्लीन चिट दी गई हो।

अब सवाल यह उठ रहा है कि रेलवे के पास यह रिपोर्ट आखिर आई कहां से?

मुआवजा अब भी अधर में

जिलाधिकारी स्तर पर करीब 1 करोड़ 38 लाख रुपये मुआवजा स्वीकृत किए जाने के बावजूद, 5 महीने बाद भी प्रभावित परिवारों को कोई राहत नहीं मिली है।

पूरे मामले को 7-8 महीने बीत चुके हैं।

स्थानीय लोगों की मांगजांच हो सार्वजनिक

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि:

  • इस पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी किया जाए
  • जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो

उनका कहना है कि यह सिर्फ एक कॉलोनी का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में चल रही बड़ी परियोजना की पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा है।

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