समिति ने जनता का जताया आभार
आस्था, अनुशासन और जनसहयोग से सकुशल संपन्न हुई पावन यात्रा
माता कालीमाई की 51 दिवसीय प्रथम चरण की दिवारा यात्रा का निर्विघ्न, शांतिपूर्ण एवं सफल समापन हो गया है।
यात्रा के समापन पर दिवारा यात्रा समिति के अध्यक्ष लखपत राणा ने
समस्त क्षेत्रवासियों, श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि माता कालीमाई की कृपा, जनसहयोग तथा प्रशासन के बेहतर समन्वय से
यह पावन यात्रा अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सकुशल संपन्न हुई, जो पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
श्रद्धालुओं में दिखा अनुशासन और सेवा भाव
समिति अध्यक्ष ने बताया कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था, अनुशासन और सेवा भाव देखने योग्य रहा।
दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने पूरे 51 दिनों तक यात्रा की मर्यादा और परंपराओं का
पालन करते हुए माता कालीमाई के दर्शन किए।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और लोक आस्थाओं को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम भी है।

सहयोग देने वालों की भूमिका की सराहना
लखपत राणा ने यात्रा को सफल बनाने में
- स्थानीय ग्रामीणों
- महिला मंगल दलों
- युवक मंगल दलों
- स्वयंसेवकों
- पुजारियों
- ढोल-दमाऊ वादकों
- भंडारा एवं सेवा कार्य से जुड़े सहयोगियों
की भूमिका की सराहना की।
इसके साथ ही उन्होंने सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता व्यवस्थाओं में सहयोग देने वाले
प्रशासन और पुलिस विभाग का विशेष रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया।
भविष्य में और भव्य स्वरूप देने का संकल्प
समिति अध्यक्ष ने कहा कि भविष्य में भी माता कालीमाई की दिवारा यात्रा को और अधिक सुव्यवस्थित,
सुरक्षित एवं भव्य स्वरूप देने के लिए समिति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।
उन्होंने जनता से आगामी चरणों में भी इसी प्रकार सहयोग और आशीर्वाद बनाए रखने
की अपील करते हुए माता कालीमाई से क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
इन क्षेत्रों व लोगों ने व्यक्त किया आभार
51 दिवसीय प्रथम चरण की दिवारा यात्रा के सफल समापन पर
समिति अध्यक्ष लखपत राणा, महामंत्री सुरेशानंद गौड़, कालीमठ मंदिर प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, दिवारा यात्रा समिति के पदाधिकारी एवं सदस्यगणों के साथ-साथ
कालीमठ, कविल्ठा, ब्यूखी, कुणजेठी, बेडूला, जग्गी बगवान सहित विभिन्न गांवों के ग्रामीणों व जनमानस,
कालीमठ घाटी, मदमहेश्वर घाटी, ऊखीमठ, गुप्तकाशी, भीरी, चन्द्रापुरी, सौड़ी, अगस्तमुनि, रामपुर,
तिलवाड़ा, रुद्रप्रयाग, धारी देवी, श्रीनगर एवं देवप्रयाग क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों व सदस्यों का आभार व्यक्त किया गया।















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