केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है। हिमाचल प्रदेश से लेकर राजधानी दिल्ली तक स्वर्ण समाज के विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन कर इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए वापस लेने की मांग की है।
दिल्ली के जंतर-मंतर और हिमाचल के शिमला, कांगड़ा सहित कई जिलों में विरोध प्रदर्शन किए गए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए नियम समानता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं और सामान्य वर्ग के छात्रों व कर्मचारियों को कानूनी रूप से असुरक्षित स्थिति में डालते हैं।
उनका कहना है कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए, न कि किसी एक वर्ग के खिलाफ कठोर और किसी के लिए नरम।
सोशल मीडिया पर भी बढ़ी हलचल
आंदोलन के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी यूजीसी के नए नियमों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें पिछड़े वर्ग (OBC) समेत अन्य वर्गों को सतर्क रहने की अपील की गई है।
पोस्ट में दावा किया गया है कि नए नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई का दायरा व्यापक हो सकता है, जिससे कई वर्ग प्रभावित हो सकते हैं।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख आपत्तियां
स्वर्ण समाज के संगठनों का कहना है कि
- अलग-अलग वर्गों के लिए कानूनी प्रावधानों में असमानता है।
- प्रवेश के समय प्रमाण-पत्र न होने की स्थिति में छात्रों की कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं रहती।
- नए नियमों से सामान्य और मध्यम वर्ग में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
हिमाचल में उग्र विरोध
हिमाचल प्रदेश में विरोध सबसे अधिक मुखर नजर आ रहा है। शिमला और कांगड़ा में रैलियां निकालकर सरकार से नियमों की समीक्षा की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि वे किसी वर्ग के विरोध में नहीं हैं, लेकिन भेदभावपूर्ण कानून स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
सरकार की ओर से जवाब का इंतजार
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह विरोध केवल यूजीसी नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि आरक्षण और मौजूदा कानूनी ढांचे को लेकर लंबे समय से चली आ रही नाराजगी का परिणाम है।
फिलहाल केंद्र सरकार और यूजीसी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

















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