शम्भु प्रसाद भट्ट ‘स्नेहिल’
युद्ध कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं रहा है। आज जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संघर्ष और हिंसा बढ़ती जा रही है, तब मानवता कराह रही है।
संवेदनाएं कमजोर होती जा रही हैं और मनुष्य, मनुष्य की पीड़ा से बेपरवाह होता जा रहा है। विकृत होती मानवीय सोच ही आज सबसे बड़ा संकट बन चुकी है।
मानवता और प्रकृति का साझा शत्रु है युद्धयुद्ध नहीं, शांति ही समाधान: मानवता की कराह और वैश्विक संकट पर साहित्यकार की चेतावनीयुद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं
युद्ध केवल मानव जीवन का ही नहीं, बल्कि संपूर्ण जीव-जगत का सबसे बड़ा दुश्मन है। यह सामाजिक सौहार्द, एकता और राष्ट्रीय अखंडता को तोड़ने का कार्य करता है।
युद्ध ऐसी बाधा है जो कभी भी किसी देश या समाज के हित में नहीं हो सकता। इसका असर पीढ़ियों तक महसूस किया जाता है।
वैश्विक युद्धों से धरती पर बढ़ता खतरा
यूक्रेन-रूस युद्ध, इजरायल-हमास संघर्ष और अमेरिका-ईरान के बीच बनी तनावपूर्ण स्थिति केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का रूप ले चुकी है।
ये टकराव न सिर्फ वर्तमान को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि पृथ्वी की जैव विविधता और भविष्य की मानव सभ्यता के लिए भी गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।
भविष्य की पीढ़ियों पर पड़ेगा युद्ध का बोझ
युद्ध से होने वाली जन-धन की हानि तुरंत दिखाई देती है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम कहीं अधिक भयावह होते हैं।
आने वाली पीढ़ियां हमारे आज के फैसलों और सोच को कोसेंगी कि हमने उनके लिए विनाश के बीज बो दिए।
इसलिए केवल आज को नहीं, बल्कि आने वाले कल को भी सुरक्षित और सुखद बनाना हमारी जिम्मेदारी है।
प्रेम और सौहार्द ही एकमात्र रास्ता
युद्ध के स्थान पर प्रेम, सहअस्तित्व और सौहार्द ही हर समस्या का स्थायी समाधान है।
मानवता का अस्तित्व तभी सार्थक हो सकता है, जब हम वैमनस्य और महत्वाकांक्षा के स्थान पर करुणा और समझ को अपनाएं।
















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