स्यानाचट्टी में हाईवे और कस्बा जलमग्न
यमुनोत्री हाईवे पर स्थित स्यानाचट्टी में यमुना नदी पर बनी झील से खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। चटख धूप खिलने के साथ झील का जलस्तर और ऊपर उठ गया, जिससे पूरा कस्बा जलमग्न हो गया है।
गुरुवार, 21 अगस्त देर शाम से झील का मुहाना खोलने का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।
जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने स्यानाचट्टी में मौजूद लगभग 60 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया।
वहीं नीचे स्थित कुथनौर और खराड़ी के ग्रामीण भी एहतियातन अपने-अपने गांवों की ओर चले गए हैं। स्यानाचट्टी के होटलों और आवासीय भवनों को भी खाली करा लिया गया है।
पुल डूबने से राहत-बचाव कार्य प्रभावित
झील का पानी बढ़ने से यमुनोत्री हाईवे पर स्यानाचट्टी का मोटर पुल भी डूब गया है। पुल डूबने की वजह से एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें खराड़ी में फंसी हुई हैं और आगे राहत कार्य के लिए बढ़ नहीं पा रही हैं।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, स्यानाचट्टी के समीप बहने वाले कुपड़ा खड्ड में अचानक मलबा और बोल्डर आ जाने से यमुना नदी का प्रवाह रुक गया और झील बन गई। लगभग 400 मीटर लंबी और 300 मीटर चौड़ी इस झील का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है।
गांव खाली, लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुँचे
स्थिति बिगड़ने पर कुथनौर और खराड़ी के तटीय इलाकों को खाली करवाया गया। कई ग्रामीण पहले ही खतरे को भांपकर स्यालना, पुजारगांव, पालीगांव, भंसाड़ी और खनेड़ा जैसे अपने मूल गांवों में लौट गए। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को अस्थायी शिविरों में सुरक्षित ठहराने की व्यवस्था की है।
सिंचाई विभाग द्वारा पोकलैंड मशीनों से नदी के बहाव को चैनलाइज करने का काम किया जा रहा था, लेकिन कुपड़ा खड्ड से लगातार आ रहे मलबे और पत्थरों ने यह प्रयास विफल कर दिया। नतीजतन झील का पानी बढ़ता गया और आसपास के मकान पानी में डूब गए।
जिला प्रशासन ने कहा है कि झील की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और मौसम विभाग से भी अलर्ट जारी किया गया है। फिलहाल राहत और बचाव दल मौके पर डटे हुए हैं, लेकिन झील का मुहाना नहीं खुल पाने से खतरा टला नहीं है।

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