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G20 2025 समिट: ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर दुनिया की नज़र

जोहांसबर्ग में 21–23 नवंबर तक होने वाला शिखर सम्मेलन जलवायु फंडिंग, ऊर्जा संक्रमण, वैश्विक विषमताओं और विकासशील देशों की आवाज़ पर केंद्रित रहेगा

दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में जोहांसबर्ग में 21–23 नवंबर 2025 तक आयोजित G20 समिट दुनिया के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि पहली बार यह शिखर सम्मेलन अफ्रीकी महाद्वीप पर हो रहा है।

सम्मेलन का मुख्य फोकस ग्लोबल साउथ की ज्वलंत समस्याओं, जलवायु संकट, विकास फाइनेंस, ऊर्जा संक्रमण और वैश्विक असमानताओं को कम करने पर होगा।

G20 समिट 2025: क्या है मुख्य एजेंडा

1. अफ्रीका का ऐतिहासिक नेतृत्व

यह समिट अफ्रीकी महाद्वीप के लिए एक बड़ा क्षण है। इससे पहले लगातार तीन बार इंडोनेशिया (2022), भारत (2023), ब्राजील (2024) ग्लोबल साउथ देशों ने G20 की कमान संभाली। अब दक्षिण अफ्रीका इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए G20 को नए दृष्टिकोण के साथ नेतृत्व दे रहा है।

अफ्रीका के सामने जलवायु, गरीबी, स्वास्थ्य ढांचे और संसाधन निवेश जैसे क्षेत्रीय मुद्दे हैं, जिन्हें इस मंच पर वैश्विक समर्थन मिलने की उम्मीद है।

2. जलवायु फाइनेंस और ऊर्जा संक्रमण प्रमुख मुद्दा

G20 2025 के मुख्य स्तंभों में क्लाइमेट फाइनेंस, कार्बन उत्सर्जन में कटौती, और जस्ट एनर्जी ट्रांज़िशन शामिल हैं।

विकासशील देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करते हुए ग्रीन ट्रांज़िशन कैसे करें।
इस साल की प्रेसीडेंसी का लक्ष्य है:

  • क्लाइमेट फंडिंग को सरल और बढ़ाना
  • तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करना
  • ऊर्जा ट्रांसफॉर्मेशन के लिए दीर्घकालिक वैश्विक साझेदारी तैयार करना

3. जल संकट और पानी में निवेश पर बड़ा फोकस

ग्लोबल साउथ के कई देशों में पानी की कमी, जल सुरक्षा और जल प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं।

इसी वजह से दक्षिण अफ्रीका ने Global Outlook Council on Water Investments लॉन्च किया है, ताकि:

  • पानी के सतत प्रबंधन को क्लाइमेट डिबेट का मुख्य हिस्सा बनाया जा सके
  • पानी को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था का रणनीतिक संसाधन घोषित किया जा सके

यह पहल G20 के इतिहास में पानी पर पहली बड़ी वैश्विक पहल मानी जा रही है।

4. भू-राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सहयोग

दुनिया अभी कई संकटों—युद्ध, आपूर्ति शृंखला टूटना, खाद्य महंगाई, और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता—का सामना कर रही है।
G20 समिट इन मुद्दों को लेकर सामूहिक रणनीति बनाने पर काम करेगा:

  • वैश्विक व्यापार में रुकावटों को कम करना
  • खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना
  • वैश्विक ऋण बोझ से परेशान देशों को राहत देना
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना

5. ‘A Resilient World’ के लिए नई रूपरेखा

सम्मेलन की दूसरी थीम एक स्थाई और लचीली दुनिया आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य ढांचे, खाद्य प्रणालियों और जलवायु अनुकूलन के लिए एक वैकल्पिक रोडमैप पेश करेगी।

इसमें प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित देशों, खासकर छोटे द्वीपीय और कम आय वाले राष्ट्रों के लिए विशेष प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

6. ‘A Fair and Just Future for All’ — भविष्य की वैश्विक संरचना

G20 समिट 2025 भविष्य में वैश्विक विकास की नई संरचना निर्धारित करने की कोशिश करेगा। इसकी प्राथमिकताएँ होंगी:

  • एआई और डिजिटल इकॉनमी के लिए न्यायपूर्ण वैश्विक नियम
  • क्रिटिकल मिनरल्स पर साझेदारी
  • युवा और श्रमिकों के लिए उत्पादक, सम्मानजनक रोजगार
  • गरीब देशों का टेक्नोलॉजी तक आसान पहुँच

ये सभी एजेंडा विकासशील देशों के लिए दीर्घकालिक लाभ प्रदान कर सकते हैं।

भारत की भूमिका: संतुलित, रचनात्मक और विकास-केंद्रित

भारत इस समिट में स्थिरता, ग्रीन डेवेलपमेंट, डिजिटल पब्लिक गुड्स और वैश्विक समानता जैसे मुद्दों पर योगदान देगा।

भारत अफ्रीका के साथ ऐतिहासिक रिश्तों, विकास सहयोग और ग्लोबल साउथ की साझा आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने पर भी केंद्रित रहेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21–23 नवंबर 2025 को दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में होने वाले 20वें G20 नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना हो चुके हैं।

दी इस मौके को भारत के “वसुधैव कुटुंबकम” दृष्टिकोण और “वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर” थीम के माध्यम से ग्रीन और समावेशी विकास की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में देख रहे हैं।

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